बांदा के कालिंजर किले के अनसुने रहस्य, इसके अंदर मौजूद नीलकंठेश्‍वर महादेव की ये है कहानी

यूपी तक

• 05:34 PM • 27 May 2026

Banda Qila: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में स्थित कालिंजर किला भारत के सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक दुर्गों में से एक है. यह किला अपने गौरवशाली इतिहास, भगवान शिव से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं, शानदार वास्तुकला और चंदेलकालीन विरासत के लिए प्रसिद्ध है.

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उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में स्थित कालिंजर किला भारत के सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक किलों में गिना जाता है. माना जाता है कि इसका इतिहास हजारों साल पुराना है. यह किला कई राजवंशों के उत्थान और पतन का गवाह रहा है. चंदेल शासकों ने इसे अपनी शक्ति का प्रमुख केंद्र बनाया था. महमूद गजनवी, कुतुबुद्दीन ऐबक और हुमायूं जैसे कई शासकों ने इस किले पर कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन लंबे समय तक इसे जीत नहीं सके. बाद में मुगल सम्राट अकबर ने इस पर अधिकार किया.
 

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कालिंजर किला धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकला विष पीने के बाद भगवान शिव यहां आए थे और उन्होंने विष के प्रभाव को यहीं शांत किया था. कहा जाता है कि इसी कारण इस स्थान का नाम कालिंजर पड़ा. किले के भीतर स्थित नीलकंठेश्‍वर महादेव मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है और दूर-दूर से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
 

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कालिंजर किला अपनी भव्य वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है. विशाल पत्थरों से बनी ऊंची दीवारें, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, भव्य प्रवेश द्वार और सुंदर नक्काशी इसे खास बनाती हैं. किले के भीतर बने महल, मंदिर और अन्य संरचनाएं उस दौर की उत्कृष्ट शिल्पकला को दर्शाती हैं. पहाड़ी की चोटी पर बने इस किले से आसपास का विशाल क्षेत्र दिखाई देता है, जिससे इसकी रणनीतिक महत्वता का भी अंदाजा लगाया जा सकता है.
 

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कालिंजर किले के अंदर स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ा आकर्षण है. मंदिर में स्थापित शिवलिंग और चट्टानों पर उकेरी गई प्राचीन मूर्तियां लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. मंदिर परिसर में भगवान शिव, गणेश, काल भैरव और अन्य देवी-देवताओं की कई दुर्लभ प्रतिमाएं मौजूद हैं. यह मंदिर इतिहास, कला और आस्था का अद्भुत संगम माना जाता है.

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कालिंजर किले का परिसर बहुत विशाल है और इसके भीतर कई ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं. यहां सीता सेज, पाताल गंगा, पांडव कुंड, भैरव कुंड, कोटितीर्थ, चौबे महल, रानी महल और राठौर महल जैसे महत्वपूर्ण स्थान देखने को मिलते हैं. इन संरचनाओं से पता चलता है कि यह किला केवल युद्ध और सुरक्षा का केंद्र नहीं था, बल्कि एक समृद्ध और व्यवस्थित नगर के रूप में भी विकसित था.

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कालिंजर किले का नाम भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना से भी जुड़ा हुआ है. वर्ष 1545 में अफगान शासक शेरशाह सूरी ने इस किले पर कब्जा करने के लिए हमला किया था. युद्ध के दौरान बारूद के विस्फोट में वह गंभीर रूप से घायल हो गया और बाद में उसकी मृत्यु हो गई. यह घटना भारतीय इतिहास की सबसे चर्चित सैन्य घटनाओं में गिनी जाती है और कालिंजर किले को विशेष ऐतिहासिक पहचान दिलाती है.
 

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वर्तमान समय में कालिंजर किला देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित यह किला बुंदेलखंड की ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक माना जाता है. यहां आने वाले पर्यटक प्राचीन स्थापत्य, धार्मिक स्थलों और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते हैं. इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए भी यह स्थान बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां की हर दीवार और हर पत्थर अतीत की एक कहानी सुनाता है.

 

(तस्वीरें यूपी टूरिज्म की आधिकारिक वेबसाइट से ली गई हैं.)

 

 

(इस खबर को यूपी तक के साथ इंटर्नशिप कर रहे हर्ष पाण्डेय ने संपादित किया है.)

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