Meerut Blue Drum Murder Case: उत्तर प्रदेश के मेरठ के बहुचर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत ने साहिल और मुस्कान को मौत की सजा सुनाई है. इस सख्त फैसले के बाद लोगों के बीच एक नई चर्चा शुरू हो गई है. सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे हैं कि मुस्कान की एक साल की मासूम बेटी है, इसलिए कानून के हिसाब से जब तक बच्ची छह साल की नहीं हो जाती, तब तक मुस्कान को फांसी नहीं दी जा सकती है. लेकिन मेरठ के डीजीसी क्रिमिनल केके चौबे ने इस पूरे कंफ्यूजन को दूर कर दिया है. उन्होंने साफ बताया है कि क्या सच में बच्ची के बड़े होने तक फांसी टल जाएगी या फिर कानून में इसके लिए अलग नियम मौजूद हैं.
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क्या छह साल तक टलेगी फांसी?
डीजीसी क्रिमिनल केके चौबे ने स्पष्ट किया है कि बच्ची के छह साल का होने तक फांसी रुकने की बात पूरी तरह से गलत है. यह सच है कि कानूनी व्यवस्था के तहत एक बच्ची छह साल तक अपनी मां के साथ जेल में रह सकती है. लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि तब तक अपराधी को फांसी नहीं दी जा सकती. अगर इस बीच अदालत द्वारा फांसी का समय तय कर दिया जाता है, तो उस निर्णय के आधार पर फांसी दी जा सकती है. कानून में ऐसी कोई रुकावट नहीं है कि बच्ची की वजह से फांसी रुक जाएगी.
मुस्कान के पास बचे कानूनी विकल्प
फांसी की सजा मिलने के बाद भी मुस्कान के लिए कानूनी रास्ते अभी पूरी तरह से बंद नहीं हुए हैं. केके चौबे के मुताबिक निचली अदालत से सजा मिलने के बाद किसी भी आरोपी को ऊपरी अदालत में जाने का अधिकार होता है. इस कानूनी अधिकार के तहत मुस्कान अब अपने बचाव में इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है. अगर उसे हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिलती है, तो वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी अपनी अपील दाखिल कर सकती है.
राष्ट्रपति से दया की अपील संभव
अदालती कार्यवाही के अलावा मुस्कान के पास एक और आखिरी रास्ता मौजूद रहेगा. अगर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से भी मुस्कान को कोई राहत नहीं मिलती है और उसकी फांसी की सजा बरकरार रहती है, तो वह देश के राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दाखिल कर सकती है. इन सभी कानूनी प्रक्रियाओं और अपीलों के निपटारे में अभी काफी समय लग सकता है. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मुस्कान आगे कानूनी रूप से क्या कदम उठाती है.
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