मेरठ के चर्चित 'नीले ड्रम हत्याकांड' के आरोपी मुस्कान-साहिल पहुंचे हाईकोर्ट, फांसी की सजा को दी चुनौती

उस्मान चौधरी

24 Oct 2026 (अपडेटेड: 24 Oct 2026, 06:58 PM)

मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में नया मोड़ आया है. सौरभ राजपूत की हत्या के दोषी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने फांसी की सजा और दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की है.

Sahil and Muskan

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प्यार, बेवफाई और सनसनीखेज खौफ की दास्तान बने मेरठ के बहुचर्चित 'नीले ड्रम हत्याकांड' में नया मोड़ आ गया है. कोर्ट के फांसी की सजा से बचने के लिए अब गुनहगारों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है. सौरभ राजपूत के जिस्म के 15 टुकड़े कर उन्हें सीमेंट के घोल में दफनाने वाली मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने निचली अदालत के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है. वे सिर्फ अपनी सजा को ही नहीं बल्कि अपने दोषी करार दिए जाने के फैसले को भी गलत ठहरा रहे हैं.

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क्या है मामला

यह खौफनाक कहानी 3 मार्च 2025 को मेरठ में शुरू हुई थी, जब मुस्कान और साहिल ने मिलकर सौरभ राजपूत की बेहद बेरहमी से हत्या कर दी थी. हैवानियत की हदें पार करते हुए सौरभ के शव के करीब 15 टुकड़े किए गए. साक्ष्यों को पूरी तरह मिटाने के लिए इन टुकड़ों को एक नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में भरकर ऊपर से सीमेंट का घोल डाल दिया गया ताकि किसी को भनक तक न लगे.

मर्डर के बाद दोनों ने मनाया था जश्न

इस खौफनाक हत्याकांड को अंजाम देने के बाद दोनों के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी. वे बेरहमी का यह कारनामा कर सीधे हिमाचल प्रदेश की वादियों में छुट्टियां मनाने और जश्न मनाने निकल गए थे. सोशल मीडिया पर उनके उस दौरान के कई वीडियो भी सामने आए थे. हालांकि दोनों ज्यादा समय तक कानून की नजरों से बच नहीं सके. मुस्कान के अपने ही माता-पिता ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया और साहिल की गिरफ्तारी के बाद इस सनसनीखेज राज से पर्दा उठ गया.

कानूनी दांवपेंच और हाईकोर्ट का रुख

मेरठ की जिला अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए 30 सितंबर 2026 को दोनों को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी करार दिया था. इसके ठीक दो हफ्ते बाद यानी 14 अक्टूबर को अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई थी.

अब मुस्कान और साहिल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर दी है. इस याचिका में उन्होंने न सिर्फ निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को रद्द करने की गुहार लगाई है बल्कि अपने ऊपर लगे दोष सिद्धि के फैसले को भी पूरी तरह चुनौती दी है. देखना यह होगा कि कानून की इस लंबी जंग में अब आगे क्या नया मोड़ आता है.

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