‘हम गए, पर 3 दिन तक नहीं मिल पाए...’ प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी की मां का झलका दर्द, बेटे से मुलाकात न होने पर ये कहा

यूपी तक

28 Sep 2026 (अपडेटेड: 03 Oct 2026, 11:44 PM)

वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत के बाद उनकी मां ने बेटे के वृंदावन जाने और वहां भक्ति करने से जुड़ी कई बातें बताई हैं. मां के मुताबिक दीपक पहले वृंदावन गया था और वहां परिक्रमा करने के बाद घर लौट आया था.

Rasik Dulari Sharan Mother Statement

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Rasik Dulari News: वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत के बाद उनकी मां ने बेटे के वृंदावन जाने और वहां भक्ति करने से जुड़ी कई बातें बताई हैं. मां के मुताबिक दीपक पहले वृंदावन गया था और वहां परिक्रमा करने के बाद घर लौट आया था. इसके बाद वह दोबारा वृंदावन चला गया. दीपक ने अपनी मां से कहा था, 'मम्मी, हम यहीं भक्ति कर रहे हैं.' इसके बाद वह करीब आठ महीने तक वृंदावन में रहा. मां ने बताया कि बाद में उन्हें जानकारी मिली कि गुरु दीक्षा उनके बिना नहीं मिलेगी, जिसके बाद परिवार वृंदावन पहुंचा और दीपक को समझाने की कोशिश की.

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बेटे से मिलने कई बार वृंदावन गईं मां

रसिक दुलारी की मां ने बताया कि वह बेटे से मिलने के लिए एक-दो बार नहीं, बल्कि कई बार वृंदावन गईं. हालांकि, हर बार उन्हें दीपक के बारे में अलग-अलग जानकारी दी गई. कभी कहा गया कि दीपक वहां नहीं है, तो कभी बताया गया कि वह कहीं और है. मां के मुताबिक कभी सुबह उसके किसी दूसरी जगह होने और शाम को कहीं और होने की बात कही जाती थी. उन्होंने बताया कि एक बार वह करीब तीन दिन तक वृंदावन में रहीं, लेकिन इसके बावजूद बेटे से मुलाकात नहीं हो सकी. उन्हें कभी बताया गया कि दीपक भक्ति में है, कभी गुरु जी के साथ है और कभी भीड़ की वजह से मुलाकात नहीं हो पा रही है.

फोटो भी भेजे... फिर भी बात नहीं हो सकी

मां ने बताया कि परिवार की तरफ से यह जानकारी भी दी गई थी कि दीपक के मम्मी-पापा उससे मिलने आए हैं. उनके मुताबिक उन्होंने अपनी फोटो भी भेजी थी, लेकिन इसके बावजूद बेटे से मुलाकात नहीं कराई गई. जब उनसे पूछा गया कि ऐसा क्यों हुआ, तो उन्होंने कहा कि संभव है कि वहां के कुछ नियम हों, जिनकी उन्हें जानकारी नहीं थी. मां ने कहा, 'हम तो गए तो अपन से मिली नहीं है वो.' उन्होंने यह भी बताया कि दीपक से फोन पर बातचीत भी आसानी से नहीं हो पाती थी और उन्हें यह तक स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती थी कि उस समय बेटा कहां है.

पढ़ाई में अच्छा था बेटा- मां

दीपक की मां ने बेटे के स्वभाव के बारे में बताते हुए कहा कि वह पढ़ाई-लिखाई में अच्छा था और बाद में भक्ति में भी काफी समय देने लगा था. उनके मुताबिक, दीपक करीब दो घंटे पूजा-पाठ करता था और पढ़ाई भी करता था. मां ने कहा, 'हम बेटा को यही कहते थे, पढ़ो-लिखो, सब अच्छा रहो.' उन्होंने बताया कि दीपक साल में करीब आठ बार घर आता था. जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि उनका बेटा खुद ऐसा कदम उठा सकता था, तो मां ने कहा, 'नहीं, ऐसे नहीं लगे. ऐसे नहीं लगे कि ये कदम उठा सकते थे.' इसके बाद उन्होंने कहा कि वहां क्या हुआ, यह ऊपर वाला ही जानता है, क्योंकि वह खुद वहां मौजूद नहीं थीं.