प्रेमानंद महाराज के आश्रम पर फिर एक बड़ा आरोप, 3 महीने से लापता लड़के के परिवार ने उठाए सवाल

मदन गोपाल

• 11:50 AM • 03 Oct 2026

वृंदावन के केलिकुंज आश्रम पर हाथरस के 18 वर्षीय अनुज चौधरी को 3 महीने तक छिपाकर रखने का आरोप लगा है. साधक रसिक दुलारी की मौत के बाद जागे आश्रम प्रबंधन ने लड़के के आश्रम में होने की पुष्टि की.

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वृंदावन स्थित संत प्रेमानंद महाराज के केलिकुंज आश्रम की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. साधक रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब हाथरस से गायब हुए एक 18 साल के युवक अनुज चौधरी से जुड़ा नया और गंभीर मामला सामने आ गया है. परिजनों का आरोप है कि अनुज 3 महीने पहले दीक्षा लेने की लालसा में घर छोड़कर वृंदावन आया था. लेकिन आश्रम प्रबंधन लगातार परिजनों को गुमराह करता रहा और उससे मिलने नहीं दिया. अब रसिक दुलारी की मौत के बाद मीडिया और प्रशासन के बढ़ते दबाव के बीच आश्रम प्रबंधन हरकत में आया है और स्वीकार किया है कि लड़का उन्हीं के पास है.

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दीक्षा लेने निकला था 18 साल का अनुज, 3 महीने से था लापता

हाथरस जिले के सादाबाद का रहने वाला अनुज चौधरी करीब 3 महीने पहले अपने घर से वृंदावन के लिए निकला था. परिजनों के अनुसार, वह संत प्रेमानंद महाराज से गुरु दीक्षा लेने और दर्शन करने की बात कहकर निकला था. लेकिन उसके बाद लौटकर नहीं आया. बेटे के अचानक गायब होने से परेशान परिजन पिछले 3 महीनों से लगातार वृंदावन में उसकी तलाश कर रहे थे और सोभबरी कुंड समेत आसपास के क्षेत्रों में भटक रहे थे.

"3 महीने तक किसी ने सीधे मुंह बात नहीं की"

अनुज के पिता राजवीर और उनकी दादी का आरोप है कि वे बीते 3 महीनों से लगातार केलिकुंज आश्रम के चक्कर काट रहे थे. लेकिन आश्रम का कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति उनसे सीधे मुंह बात करने को तैयार नहीं था. उन्हें न तो आश्रम के अंदर जाने दिया जा रहा था और न ही उनके बेटे के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी दी जा रही थी. परिजन रो-रोकर आश्रम के बाहर गुहार लगाते रहे. लेकिन प्रबंधन ने उनकी एक न सुनी.

साधक की मौत के बाद मीडिया दबाव बढ़ा तो हरकत में आया प्रबंधन

हाल ही में जब आश्रम के साधक रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला गरमाया और मीडिया व प्रशासन की सक्रियता बढ़ी तो केलिकुंज आश्रम प्रबंधन अचानक हरकत में आ गया. पिता राजवीर ने बताया कि जब उन्होंने एक नंबर पर संपर्क किया तो आश्रम की ओर से फोन पर बताया गया कि अनुज आश्रम के अंदर ही है और 1 से 2 घंटे के भीतर उसे परिजनों के पास भेज दिया जाएगा.

आश्रम की भूमिका पर उठे सवाल

3 महीने से भटक रहे परिजनों को अचानक बेटे के आश्रम में ही मौजूद होने की बात कहे जाने के बाद आश्रम की कार्यप्रणाली पर सवाल गहरा गए हैं. आम लोगों और श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब परिजन महीनों से बेटे को ढूंढ रहे थे तो आश्रम प्रबंधन ने उनसे सच्चाई क्यों छिपाई. हालांकि खबर लिखे जाने तक परिजनों की अपने बेटे से सीधी मुलाकात नहीं हो सकी थी और परिजन बेटे के मिलने का इंतजार कर रहे हैं.