अब ऐसे कपड़े पहनेंगे प्रेमानंद महाराज के शिष्य, केली कुंज में बदली वेशभूषा की व्यवस्था... टोकन दर्शन भी बंद

यूपी तक

• 10:24 AM • 01 Oct 2026

मथुरा-वृंदावन के केली कुंज आश्रम में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत के बाद व्यवस्थाओं में बदलाव जारी है. अब शिष्यों की वेशभूषा को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं.

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मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत के बाद केली कुंज आश्रम में व्यवस्थाओं में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं. अब शिष्यों के कपड़ों को लेकर भी नए नियम सामने आए हैं. आश्रम की ओर से दी गई सूचना के मुताबिक, अब हर शिष्य सफेद या पीला अचला नहीं पहन सकेगा. 

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शिष्यों की वेशभूषा उनकी स्थिति और आश्रम से जुड़ी जिम्मेदारी के हिसाब से तय की गई है. 30 सितंबर को सामने आई सूचना में बताया गया कि जो शिष्य विरक्त या गृहस्थ हैं और किसी व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, उन्हें अब सामान्य कपड़े या कुर्ता-पायजामा पहनना होगा. इसमें ठेला या दुकान चलाने वाले शिष्य भी शामिल हैं.

गृहस्थ शिष्यों के लिए भी बदला नियम

केली कुंज की सेवा से जुड़े गृहस्थ शिष्यों की वेशभूषा में भी बदलाव किया गया है. अगर कोई गृहस्थ शिष्य प्रेमानंद महाराज की सेवा या केली कुंज की व्यवस्था में लगा है तो उसे भी सामान्य कपड़े या कुर्ता-पायजामा पहनना अनिवार्य किया गया है.

अब आश्रम से जुड़े हर शिष्य के लिए सफेद या पीला अचला पहनना जरूरी नहीं रहेगा. वेशभूषा को लेकर अंतर साफ कर दिया गया है कि कौन शिष्य किस तरह के कपड़े पहन सकता है.

अब कौन पहन सकेगा सफेद कपड़े?

नई व्यवस्था में सफेद वस्त्र पहनने की अनुमति केवल उन विरक्त शिष्यों को होगी, जो प्रेमानंद महाराज की सेवा या केली कुंज की व्यवस्था और सेवा में लगे हुए हैं. इसका मतलब है कि सफेद वस्त्र पहनने का अधिकार अब सेवा से जुड़े खास वर्ग तक सीमित रहेगा. बाकी विरक्त या गृहस्थ शिष्यों को अपनी स्थिति के मुताबिक सामान्य कपड़े या कुर्ता-पायजामा पहनना होगा.

दीक्षा को लेकर भी बड़ा बदलाव

रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद सिर्फ वेशभूषा ही नहीं, दीक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं में भी बदलाव किया गया है. आश्रम की ओर से फाइनल दीक्षा को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है.

29 सितंबर की सूचना में बताया गया था कि दीक्षा उपस्थिति चल रही है और पहले से तय समय के मुताबिक भक्त आ सकते हैं, लेकिन 30 सितंबर को दीक्षा उपस्थिति भी अनिश्चितकाल के लिए बंद किए जाने की जानकारी दी गई.

इसका मतलब है कि फिलहाल नए लोगों को दीक्षा की प्रक्रिया से जुड़े अगले चरण के लिए नई तारीखों का इंतजार करना होगा. आश्रम की ओर से इसकी दोबारा शुरुआत की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है.

टोकन से होने वाले दर्शन भी बंद

केली कुंज में टोकन के जरिए होने वाले दर्शन भी अब अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं. इसके अलावा यमुना विहार कुंज, बेलवन वाले आश्रम में दीक्षित भक्तों के दर्शन की व्यवस्था भी बंद किए जाने की जानकारी सामने आई है.

आश्रम में सेवा से जुड़े सेवादारों ने माइक के जरिए भक्तों को इन बदलावों की जानकारी दी. आश्रम की ओर से कहा गया है कि आने वाले समय में कुछ और महत्वपूर्ण बदलावों की जानकारी दी जा सकती है.

रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत के बाद केली कुंज की व्यवस्थाओं में किए जा रहे इन बदलावों पर भक्तों की नजर है. हालांकि उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर अभी आधिकारिक तौर पर स्थिति स्पष्ट नहीं है.

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