CM योगी आदित्यनाथ को मिला RSS का साथ, 'बंटेंगे तो कटेंगे' वाली बात पर संघ ने भी लगाई अपनी मुहर

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• 09:46 AM • 27 Oct 2024

RSS and Yogi Adityanath news: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि हिंदू एकता सभी की भलाई के लिए आवश्यक है और धर्म, जाति और विचारधारा के नाम पर बांटने वाली ताकतों से सतर्क रहने की जरूरत है. उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी ‘‘बटेंगे तो कटेंगे’’ का वस्तुत: समर्थन किया.

कुछ मुलाकातें ही इतनी महत्वपूर्ण होती हैं कि बातों की अहमियत कम ही रहती है.

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RSS and Yogi Adityanath news: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि हिंदू एकता सभी की भलाई के लिए आवश्यक है और धर्म, जाति और विचारधारा के नाम पर बांटने वाली ताकतों से सतर्क रहने की जरूरत है. उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी ‘‘बटेंगे तो कटेंगे’’ का वस्तुत: समर्थन किया.  होसबाले ने कहा कि यदि 'हम (हिन्दू समाज) जाति, भाषा या प्रांत के भेद से बटेंगे, तो निश्चित रूप से कटेंगे, इसीलिए हिन्दू समाज में एकता आवश्यक है.'  वह यहां दीनदयाल उपाध्याय गौ विज्ञान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र परिसर में आयोजित संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल की द्विदिवसीय बैठक के समापन पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. 

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उनसे सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए गए नारे ‘बटेंगे तो कटेंगे’ के बारे में पूछा गया था, यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांच अक्टूबर को महाराष्ट्र के ठाणे में अपनी रैली में भी कही थी. होसबाले ने कहा कि इस बात के पीछे की भावना महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा,'हिन्दू एकता लोक कल्याण के लिए है. अपने को बचाए रखने और दूसरों का भी मंगल करने के लिए हिन्दू एकता आवश्यक है, इसीलिए हम यह एकता बनाए रखना चाहते हैं.'  

उन्होंने कहा, 'यह केवल कह देने से ही नहीं होगा. इसके लिए प्रयत्न करने पड़ते हैं. हमें इसे आचरण में लाना पड़ता है. इसमें कोई दो मत नहीं हैं.'  होसबाले ने कहा, 'मुद्दा हिंदू एकता का है. वास्तव में, हम अक्सर कहते हैं कि जो लोग हिंदू विचार को भूल जाते हैं वे आपदा को आमंत्रित करते हैं, अपने परिवार, भूमि और पूजा स्थलों को खो देते हैं. भावना एक ही है. मुद्दा समाज में एकता है. (समाज एकात्मता से नहीं रहेगा तो.. इतिहास कहता है.. हम तो कहते हैं जब जब हिंदू भाव को भूले आई विपदा महान भाई टूटे, धरती खोई मिटे धर्म संस्थान. ये हमारा गीत है... तो उसको आजकल की भाषा में आपने जो कहा हो सकता है. मुद्दा क्या है, समाज की एकता.' 

मथुरा के मामले में अयोध्या जैसा कुछ करने की जरूरत नहीं: संघ

उन्होंने कहा कि हिंदू एकता आरएसएस की प्रतिज्ञा है. उन्होंने कहा, 'संघ समाज की आवाज को दर्शाता है. हिंदू एकता सभी की भलाई, वैश्विक खुशी और शांति के लिए है. हमारी सुरक्षा और विश्व सद्भाव सुनिश्चित करने के लिए हिंदू एकता महत्वपूर्ण है. इसलिए हम हिंदू एकता का समर्थन करते हैं और इस पर कोई दो राय नहीं है.'  मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह के विवाद के बारे में उन्होंने कहा कि यह मुद्दा फिलहाल अदालत में लंबित है और 'हमें उम्मीद है कि अदालत जल्द ही इस मुद्दे को सुलझाएगी.'  उन्होंने कहा कि इस मामले में अयोध्या जैसा कुछ करने की जरूरत नहीं है और लोगों को न्यायपालिका पर भरोसा रखना चाहिए. 

वक्फ संशोधन विधेयक पर संघ की है ये राय

होसबाले ने कहा,'बहुत से लोगों ने इसकी आवाज उठाई है. हिन्दू समाज में राष्ट्रीय स्तर पर जन जागरण हो रहा है. संघ उनसे अलग नहीं, समाज के साथ है.'  होसबाले ने वक्फ (संशोधन) विधेयक से जुड़े सवालों पर कहा, 'संसद की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) इन दिनों सभी धर्मों और वर्गों के विचार सुन रही है. असल तो यह है कि पूर्व में बनाए गए वक्फ अधिनियम में 2013 में कुछ इस प्रकार के संशोधन किए गए थे जिससे उसे भारत के अंदर एक प्रकार से एक स्वतंत्र इकाई बना दिया गया था. जिलाधिकारी या कोई अन्य सक्षम अधिकारी भी उस मामले में कुछ हस्तक्षेप नहीं कर सकता था.'  उन्होंने कहा, 'यह सब ऐसे ही नहीं हो गया. इससे पहले लक्षित हिंसा पर भी एक ऐसा ही विधेयक लाने का प्रयास किया गया था. इस प्रकार की चीजों से बहुत सारी समस्याएं खड़ी हो गई हैं. यह सब एक विशेष साजिश के तहत योजनानुसार करने का प्रयत्न हुआ था, उनको ठीक करना ही पड़ेगा.'

होसबाले ने कहा कि बात सिर्फ यह नहीं है कि केवल हिन्दू ही इस विधेयक के विरोध में हैं बल्कि सच्चाई तो यह है कि मुस्लिम वर्ग के भी बहुत से लोग जेपीसी के समक्ष अपनी समस्याएं रख चुके हैं.  उन्होंने कहा, 'यह वही समुदाय हैं जो वक्फ की ज्यादती, शोषण और अन्याय से त्रस्त है. इसीलिए वे भी आपत्ति कर रहे हैं. सच तो यह है कि यह किसी एक पार्टी या समुदाय का मसला नहीं है.'

सीएम योगी से क्यों मिले थे RSS चीफ मोहन भागवत?

CM आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बीच हुई बैठक के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मुख्य रूप से प्रयागराज में होने वाले कुंभ पर चर्चा करने आए थे.  आरएसएस के महासचिव ने कहा, 'उन्होंने (आदित्यनाथ ने) कहा कि इस वर्ष कुंभ को पिछली बार से अधिक सार्थक और यशस्वी बनाने के प्रयास किए जाएंगे. उन्होंने इसके लिए तैयार की गई योजनाएं भी संघ के पदाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कीं.'  होसबाले ने कहा कि मुख्यमंत्री का मुख्य अनुरोध आदिवासी समाज के लोगों और उनके धार्मिक नेताओं को कुंभ में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना था क्योंकि कुछ कारणों से वे उस संख्या में नहीं पहुंच पा रहे हैं जितनी संख्या में उन्हें पहुंचना चाहिए. उन्होंने अनुरोध किया कि आरएसएस भी उन्हें निमंत्रण दे ताकि समाज के सभी वर्ग इस पवित्र कार्य में भाग ले सकें.

क्या RSS और बीजेपी के बीच चल रही है तनातनी?

लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा संघ पर दिए गए बयान के बाद आरएसएस और भाजपा के बीच तनातनी का दावा करने वाली खबरों पर उन्होंने कहा, 'हम एक सार्वजनिक संगठन हैं. हमारा किसी भी पार्टी से कोई झगड़ा नहीं है, भाजपा से तो बिल्कुल नहीं, क्योंकि हम ऐसा कुछ नहीं सोचते. हम सभी से मिलते हैं. हम किसी के साथ भेदभाव नहीं करते.'  उन्होंने कहा, 'हमें नफरत क्यों करनी? उल्टा, मेरा कहना है कि जो 'नफरत के बाजार में मुहब्बत की दुकान चलाना चाहते हैं, वे तो हमसे मिलना ही नहीं चाहते.' 

सोशल मीडिया और ओटीटी जैसे स्वतंत्र प्लेटफॉर्म पर आने वाली सामग्री से नई पीढ़ी पर पड़ने वाले 'प्रतिकूल प्रभाव' के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में नियमन की व्यवस्था करनी चाहिए.  उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी से फिल्मों तथा अन्य तमाम माध्यमों से क्लास रूम से लेकर बेडरूम तक सभी की पहुंच बन गई है, जो गलत है. संघ नेता ने कहा, 'इस मामले में सरकार को समाज के साथ विचार-विमर्श कर व्यवस्था बनानी चाहिए. मैं यह नहीं कहता हूं कि नियंत्रण किया जाए, किंतु नियमन अवश्य किया जाना चाहिए जिससे समाज पर विपरीत प्रभाव न पड़े.'

  

लव जिहाद पर क्या है संघ का स्टैंड?

उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं में नशीले पदार्थों के प्रयोग को रोकने में अपनी भूमिका निभानी होगी. उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि यह हमारी और परिवार की भी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों में ऐसी आदतें विकसित ही न होने दें. इसके लिए उन्हें अच्छे संस्कार डालने होंगे. समाज में उनके लिए वातावरण बनाया जाना चाहिए. संघ इसी काम को बढ़ावा देता है और आग्रहपूर्वक यह जिम्मेदारी पूरी करता है. धर्म परिवर्तन एवं लव जिहाद जैसे मुद्दों पर होसबाले ने कहा,'संघ ऐसे मामलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं करता. हिन्दू जागरण मंच एवं बजरंग दल जैसे संगठन इन्हें देखते हैं. हम ऐसी घटनाओं के पनपने के कारणों पर विचार कर उन्हें मिटाने का काम करते हैं. जिनसे ऐसी स्थिति-परिस्थितियां जन्म लेती हैं जिनसे गरीबी और सामाजिक भेदभाव जैसी समस्याओं से ग्रस्त दूसरों के प्रलोभन में आ जाते हैं या फिर अन्य बातें उन्हें आकर्षित करने लगती हैं.'  

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि केरल की एक घटना के बाद '200 युवतियां वापस लौट आईं. लेकिन उनके लिए तब समस्या थी कि उन्हें समाज किस प्रकार अंगीकार करेगा. वे जीवन में आगे कैसे बढ़ेंगी आदि-आदि. तब संघ आगे आया और एक संस्था का साथ देकर उन्हें पुनर्वासित कराया. उनमें से कुछ ने तो संकल्प ही ले लिया कि भविष्य में अन्य युवतियों को लव जिहाद से बचाने के लिए ही जीवन पर्यंत कार्य करेंगी। संघ उन्हें संबल देकर शिक्षण-प्रशिक्षण देता है.'

देश में RSS ने लिया कितना विस्तार?

उन्होंने कहा कि इस वर्ष मार्च में आयोजित आरएसएस की प्रतिनिधि सभा के परिणामों की यहां हुई बैठक में समीक्षा की गई. संघ ने इस साल 99 साल पूरे कर लिए हैं और शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने कहा, 'इस बात पर चर्चा हुई कि अगले साल विजयादशमी पर किस तरह कार्यक्रम आयोजित किए जाएं.'  उन्होंने कहा,‘‘ हम पंच परिवर्तन (स्व आधारित जीवन शैली, सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण और नागरिक कर्तव्य) के विषयों को लेकर समाज के बीच जाएंगे.’’

उन्होंने बताया कि कार्य विस्तार की दृष्टि से 45,411 स्थानों पर 72,354 शाखाएं चल रही हैं. पिछले वर्ष की तुलना में 3,626 स्थान और 6,645 शाखाएं बढ़ी हैं. ऐसे ही सप्ताह में होने वाले साप्ताहिक मिलन की संख्या 29,369 रही, इसमें 3,147 वार्षिक वृद्धि हुई है. उन्होंने बताया कि 11 हजार 382 स्थानों पर संघ मंडलियों में 750 स्थानों की वृद्धि हुई है. ऐसे कुल 1,13,105 स्थानों पर अगले वर्ष बंगलूरू में होने वाली प्रतिनिधि सभा की बैठक से पूर्व विस्तार किया जाएगा. उन्होंने विगत वर्षों में संघ कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों एवं पश्चिम बंगाल, बिहार, गुजरात, उड़ीसा, कर्नाटक व केरल आदि राज्यों में प्राकृतिक आपदा के समय की गई सामाजिक सहायता के भी उदाहरण पेश किए.