प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध मौत के बाद परिजनों ने आश्रम पर लगाए कौन-कौन से आरोप?

यूपी तक

• 07:13 PM • 26 Sep 2026

वृंदावन के राधा केली कुंज आश्रम में रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की चौथी मंजिल से गिरकर संदिग्ध मौत हुई. जबलपुर से पहुंचे परिजनों ने आश्रम प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पुलिस हत्या और आत्महत्या दोनों पहलुओं से जांच कर रही है.

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उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित राधा केली कुंज आश्रम में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की चौथी मंजिल से गिरकर हुई संदिग्ध मौत के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा है. जबलपुर से वृंदावन पहुंचे परिजनों ने आश्रम प्रबंधन के रवैये और व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं. परिजनों का कहना है कि जब से दीपक ने गुरु दीक्षा ली थी तब से आश्रम वाले उन्हें अपने ही बेटे से मिलने तक नहीं देते थे. यही नहीं हादसे की सूचना पाकर जब परिवार आधी रात को आश्रम पहुंचा तो उन्हें जानकारी देने के बजाय रात भर बाहर बैठने को मजबूर किया गया.

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गुरु दीक्षा के बाद मिलने पर लगा दी थी पाबंदी

जबलपुर से आए परिजनों का आरोप है कि दीपक साल 2024 से आश्रम में रह रहा था. लेकिन जब से उसने गुरु दीक्षा ली आश्रम प्रबंधन ने परिजनों और रिश्तेदारों से उसका संपर्क पूरी तरह कटवा दिया. जब भी परिवार के लोग दीपक से मिलने वृंदावन आते थे तो उन्हें एक-दो घंटे रुको कहकर टाल दिया जाता था. परिजन तीन-तीन दिनों तक मिलने के लिए आश्रम के चक्कर काटते रह जाते थे. लेकिन अंत में उन्हें बिना मिले ही वापस भेज दिया जाता था.

फोन पर मिली ये जानकारी

परिजनों को फोन पर सूचना दी गई कि उनका बेटा गिर गया है और अस्पताल में उसका ऑपरेशन होना है. बेटे की सलामती की दुआ मांगते हुए परिजन तुरंत जबलपुर से वृंदावन के लिए रवाना हो गए.

रात 3 बजे पहुंचे तो 5 घंटे तक बाहर बिठाया

हादसे की खबर मिलते ही परिजन रात करीब 3 बजे प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचे. लेकिन वहां उनके साथ अमानवीय बर्ताव किया गया. आरोप है कि आश्रम में मौजूद लोगों ने घटना के बारे में कोई भी साफ जानकारी देने से साफ मना कर दिया. गमगीन परिजनों को दिलासा देने के बजाय सुबह 8 बजे तक आश्रम के बाहर ही बैठने को कह दिया गया. परिवार 5 घंटे तक मानसिक पीड़ा झेलते हुए बाहर बैठा रहा. लेकिन किसी ने उन्हें स्थिति नहीं बताई.

सांत्वना देने तक नहीं आया आश्रम का कोई जिम्मेदार

परिजनों ने भारी मन से आश्रम प्रबंधन की संवेदनहीनता पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटना घट जाने के बाद भी आश्रम का कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति या प्रतिनिधि उनसे मिलने, सांत्वना देने या मदद करने तक नहीं आया. मृतक के शरीर पर गंभीर चोट और प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान से जुड़े सवाल पर परिजन ने बताया कि उन्हें इस घटना को आत्महत्या मानने से इनकार कर दिया. उनका कहना है कि दीपक बेहद सुलझा हुआ और शांत स्वभाव का लड़का था. उसने कभी ऐसी कोई बात नहीं की जिससे लगे कि वह तनाव या डिप्रेशन में है. फिलहाल पुलिस हत्या और खुदकुशी दोनों ही पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है.


 

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