प्राइवेट स्कूल की महंगी फीस और स्टेशनरी का सच! देखिए लखनऊ से ये स्पेशल रिपोर्ट

लखनऊ के प्राइवेट स्कूलों में किताबों और स्टेशनरी की बढ़ती कीमतों से अभिभावक परेशान हैं. खास दुकानों से सामान खरीदने के दबाव को लेकर प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है.

यूपी तक

• 11:25 AM • 09 Apr 2026

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निजी स्कूलों में इस बार शिक्षा का बजट बढ़ाना अभिभावकों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. स्कूलों द्वारा निर्धारित दुकानों से महंगी किताबें और ब्रांडेड स्टेशनरी खरीदने के दबाव ने पेरेंट्स के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है. हालात यह हैं कि कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन और नोकझोंक की स्थितियां भी बन रही हैं.

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'बाजार से सस्ता, स्कूल से महंगा', पेरेंट्स का दर्द

अभिभावकों का आरोप है कि जो किताबें और स्टेशनरी बाजार में कम दामों पर उपलब्ध हैं, उन्हें स्कूलों द्वारा बताए गए वेंडर्स से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है. पेरेंट्स का कहना है कि स्कूलों ने विशेष पब्लिशर्स और ब्रांड्स के साथ सांठगांठ कर रखी है, जिससे शिक्षा अब सेवा के बजाय व्यापार बनती जा रही है.

काग और छपाई का हवाला दे रहे स्कूल संचालक

दूसरी ओर, स्कूल संगठनों और अधिकारियों का तर्क है कि किताबों की कीमतों में यह उछाल कागज की बढ़ती कीमतों और प्रिंटिंग लागत में वृद्धि के कारण हुआ है. स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इस संबंध में बैठकें भी की हैं. उन्होंने सुझाव दिया है कि कीमतों को नियंत्रित करने के लिए पुरानी किताबों को डोनेट करने और उन्हें जरूरतमंद छात्रों को उपलब्ध कराने जैसे अभियान चलाए जाएंगे.

नियम ताक पर, प्रशासन की 'चुप्पी' पर सवाल

शैक्षिक नियमों के मुताबिक, कोई भी स्कूल किसी अभिभावक को किसी खास दुकान या ब्रांड से सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता. हालांकि, जमीन पर इन नियमों का पालन होता नहीं दिख रहा है. अभिभावकों का कहना है कि शिकायत करने पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होने का डर बना रहता है, जिसके कारण वे चुपचाप आर्थिक बोझ सहने को मजबूर हैं.

गुणवत्ता और पारदर्शिता की मांग

अभिभावकों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि किताबों की गुणवत्ता और कीमतों की कड़ी निगरानी की जाए. उनका कहना है कि अगर सरकार समय रहते हस्तक्षेप नहीं करती, तो मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाना सपना बनकर रह जाएगा.