उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मूसलाधार बारिश और उफनती गोमती नदी ने भारी तबाही मचाई है. शहर के रिहायशी इलाकों से लेकर वीआईपी स्पॉट्स तक सब जलमग्न हो चुके हैं. स्थिति यह है कि लखनऊ का मशहूर फीनिक्स पलासिओ मॉल पानी से भर चुका है. निचले और बाढ़ प्रभावित इलाकों में हालात बेहद खौफनाक हैं. लोगों के किचन से लेकर बेडरूम तक डूबे हुए हैं और परिवार छतों पर शरण लेने को मजबूर है. ग्राउंड जीरो पर अब उम्मीद की एकमात्र किरण राहत सामग्री लेकर पहुंच रही बोट ही बनी हुई है.
ADVERTISEMENT
टापू बना फीनिक्स पलासिओ मॉल, सड़कें जलमग्न
लगातार हुई तेज बारिश और गोमती नदी के बढ़े जलस्तर ने शहर के सबसे व्यस्त और आधुनिक इलाकों की रफ्तार रोक दी है. फीनिक्स पलासिओ मॉल के चारों ओर जलभराव के कारण गाड़ियों की आवाजाही ठप हो गई है. मॉल के आसपास की सड़कें नदियों जैसी दिखाई दे रही हैं जिससे आम जनता और खरीदारों का वहां तक पहुंचना असंभव हो गया है.
बेडरूम-किचन डूबे, छतों पर कटी रातें
बाढ़ प्रभावित इलाकों से ग्राउंड जीरो की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं वे दिल दहला देने वाली हैं. लोगों के घरों के अंदर कई फीट पानी भर चुका है. खाने-पीने का सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और फर्नीचर सब जलमग्न हो गए हैं. जलभराव के कारण लोग अपने ही घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं. सुबह से हाथ में राशन की आस लिए लोग छतों के किनारे खड़े होकर मदद का इंतजार कर रहे हैं.
संकरी गलियों में राहत पहुंचाने की जद्दोजहद
पानी से पूरी तरह घिरे इन मकानों तक पैदल पहुंचना नामुमकिन हो चुका है. ऐसे में राहत बचाव टीमें संकरी गलियों के बीच से बोट निकालकर लोगों तक पीने का पानी, ब्रेड और नाश्ते का सामान पहुंचा रही हैं. छतों पर बैठे बच्चे और बुजुर्ग राहत बोट के आते ही उम्मीद से हाथ हिलाते दिखाई देते हैं.
प्रशासन का दावा: 100 बोट और 2000 परिवारों तक मदद
स्थिति पर काबू पाने के लिए प्रशासन भी मुस्तैद होने का दावा कर रहा है. एडीएम सिटी महेंद्र पाल के मुताबिक 'बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य के लिए करीब 100 बोट उतारी गई हैं. इनके जरिए लगभग 2000 प्रभावित परिवारों तक राशन और जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है. प्रभावित क्षेत्रों में लाउडस्पीकर के जरिए लगातार अनाउंसमेंट कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की जा रही है.'
ग्राउंड जीरो की हकीकत और बड़ा सवाल
प्रशासनिक दावों के बावजूद कई संकरे इलाकों में फंसे परिवारों तक मदद पहुंचने की रफ्तार धीमी नजर आ रही है. छत पर अटकी जिंदगी और चारों तरफ भरे पानी के बीच फंसे लोगों की निगाहें अब भी सिर्फ उस बोट पर टिकी हैं जो उनके लिए राशन और सुरक्षा का संदेश लेकर आ रही है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि उफनती गोमती और लगातार बारिश के बीच प्रशासन कितनी जल्दी हर एक पीड़ित परिवार तक मदद पहुंचा पाता है.
ADVERTISEMENT











