Lucknow Eco Garden Protest: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का इको गार्डन एक बार फिर प्रतियोगी छात्रों और युवाओं की हुंकार से गूंज उठा है. विभिन्न सरकारी भर्तियों में स्कोर कार्ड जारी करने की मांग को लेकर हजारों छात्र और कई प्रतिष्ठित शिक्षक आमरण अनशन पर बैठ गए हैं. लेकिन इस छात्र आंदोलन के बीच उस वक्त सियासी ड्रामा देखने को मिला जब कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके अचानक छात्रों के बीच पहुंचे. हालांकि वह आंदोलनकारी शिक्षकों और विवेक सर के मुख्य मंच से अलग हटकर बैठ गए और करीब आधा घंटा गुजारने के बाद वहां से चले गए. इस पर आंदोलन की अगुवाई कर रहे शिक्षकों और अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा. शिक्षकों ने कहा कि हम यहां छात्रों के हक की लड़ाई लड़ने आए हैं, कोई राजनीतिक दिखावा या मुद्दा भटकाने नहीं.
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कौन हैं डमरू वाले बाबा और क्या है छात्रों की मुख्य मांग?
इको गार्डन में सुबह से ही इंकलाब जिंदाबाद के नारे गूंज रहे हैं. छात्रों के साथ जमीन पर बैठे एग्जामपुर एकेडमी के प्रसिद्ध गणित शिक्षक विपुल बंसल जिन्हें छात्र प्यार से डमरू वाले बाबा कहते हैं. विपुल बंसल ने यूपी Tak से बातचीत में आंदोलन की मुख्य वजह बताई. उन्होंने कहा 'हमारी सबसे मुख्य और छोटी सी मांग यह है कि यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड और यूपीएसआई समेत जितने भी एग्जाम होते हैं उनका फाइनल स्कोर कार्ड सार्वजनिक किया जाए. एक गरीब छात्र प्राइवेट नौकरी कर के पैसे कमाता है फिर साल भर तैयारी करता है.पेपर देने के बाद उसे यह जानने का पूरा संवैधानिक हक है कि उसका स्कोर क्या है. जब तक स्कोर कार्ड जारी नहीं होगा हमारा यह आमरण अनशन खत्म नहीं होगा.'
अभिजीत दीपके की एंट्री और एग्जिट पर भड़के अभ्यर्थी
आंदोलन के दौरान उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई जब कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके युवाओं की आवाज बुलंद करने का दावा करते हुए इको गार्डन पहुंचे. लेकिन वे मुख्य धरने में शामिल होने के बजाय अलग घेरा बनाकर बैठ गए.
इस पर छात्रों के प्रतिनिधि शिवम सिंह राजावत ने यूपी Tak से कहा 'अभिजीत दीपके आए जरूर थे लेकिन जहां हम छात्र और शिक्षक बैठे थे वह उससे अलग जाकर बैठ गए. हम बच्चों के साथ व्यस्त थे. इसलिए मुलाकात नहीं हो पाई और वे चले गए. अगर वह बच्चों के समर्थन में आए हैं तो उनका स्वागत है. लेकिन अगर कोई दूसरा मामला है या मुद्दे को भटकाना चाहते हैं तो फिर उनकी मर्जी. अगर बच्चों के साथ हैं तो उन्हें रुकना चाहिए था.हम दिखावा करने नहीं आए हैं. हमारी कोचिंग सील हुई, सब कुछ दांव पर लगा है, हम बच्चों के लिए रात-दिन यहीं सोएंगे.'
'सिस्टम से लीगल तरीके से लड़ेंगे
आंदोलनकारी शिक्षकों ने साफ कर दिया कि वे किसी भी तरह की हिंसा या आक्रोश के खिलाफ हैं. वे पूरी तरह से लीगल तरीके से प्रशासन को दोबारा ज्ञापन सौंपेंगे. शिक्षकों ने कहा कि भले ही सिस्टम रात में रुकने की अनुमति देने में आनाकानी करे. लेकिन छात्र और शिक्षक एकजुट हैं और मांगें पूरी होने तक इको गार्डन से एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे.
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