कानपुर के चर्चित करोड़पति कारोबारी विनीत मनोचा हत्याकांड की जांच में पुलिस के हाथ एक ऐसा चौंकाने वाला मोड़ लगा है जिसने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी है. शुरुआत में जिस कत्ल का इल्जाम बहू शालू पर लगा था और जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था उस केस में अब असली गुनहगार का बेपर्दा सच सामने आ गया है.
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पिता की हत्या का मुख्य साजिशकर्ता कोई और नहीं बल्कि उनका अपना ही 34 साल का बेटा सुब्रत मनोचा निकला. पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए सुब्रत ने पूछताछ के दौरान अपना जुर्म कबूल करते हुए 40 लाख रुपये के कर्ज, जायदाद खोने के डर और बहू को फंसाकर रची गई खौफनाक साजिश की पूरी दास्तान बयां कर दी है.
40 लाख का भारी कर्ज और संपत्ति छिनने का डर
पुलिस कस्टडी में सुब्रत ने कबूल किया कि उसने ही पिता को रास्ते से हटाने का पूरा ताना-बाना बुना था. हत्या के पीछे की असली वजह भी सामने आई है.
पिता के कैरेक्टर पर शक
सुब्रत का आरोप था कि उसके पिता का चरित्र ठीक नहीं था और कई महिलाओं के साथ उनके अवैध संबंध थे. उसे डर था कि पिता किसी अन्य महिला को घर ले आएंगे या अपनी संपत्ति उनके नाम कर देंगे. सुब्रत पर करीब 40 लाख रुपये का भारी-भरकम कर्ज था जिसकी हर महीने 55000 से 60000 रुपये की किस्त जाती थी. वहीं पिता उसे खर्च के लिए सिर्फ 40000 रुपये ही देते थे. किस्तों को भरने के लिए वह नया लोन लेता था. क्रेडिट कार्ड स्वाइप करता था और यहां तक कि अपनी ही दुकान से सामान चोरी करवाकर बिकवाता था.
3-4 महीने पहले बुना गया हत्या का ताना-बाना
सुब्रत ने बताया कि उसने करीब तीन-चार महीने पहले ही पिता की हत्या का प्लान तैयार कर लिया था. उसने विशाल नाम के शख्स को इस साजिश में शामिल किया और बदले में उसका 1.5 से 2 लाख रुपये का कर्ज चुकाने का वादा किया. शुरुआत में विशाल ने ई-रिक्शा से टक्कर मारकर एक्सीडेंट का रूप देने का सुझाव दिया था. लेकिन सुब्रत ने पकड़े जाने के डर से इसे खारिज कर दिया.
वारदात के लिए 5 सितंबर की रात तय की गई, जब घर में किट्टी पार्टी थी और परिवार के बाकी सदस्य बाहर जाने वाले थे.साजिश को अंजाम देने के लिए सुब्रत ने बेहद शातिराना कदम उठाए. उसने अपनी गाड़ी से घर की असली चाबी निकालकर विशाल को दी जिसने उसकी डुप्लीकेट चाबी बनवा ली. घटना वाली रात सुब्रत ने घर के सभी सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग बंद कर दी थी.
दम घोंटकर मर्डर की योजना
सुब्रत ने विशाल और उसके साथी राज किशोर को निर्देश दिया कि उसके बाहर निकलते ही वे डुप्लीकेट चाबी से अंदर घुसकर कमरे में छिप जाएं. जब पिता खाना खाकर सो जाएं तो एक आरोपी उनके पैर पकड़े और दूसरा तकिए से मुंह दबाकर उन्हें मार डाले. योजना यह थी कि सुबह मौत होने पर रिश्तेदारों को फोन करके इसे हार्ट अटैक या प्राकृतिक मौत बता दिया जाएगा ताकि किसी को शक न हो.
बेकसूर बहू शालू को फंसाने की साजिश
सुब्रत ने पुलिस को साफ बताया कि उसकी पत्नी शालू इस पूरी साजिश से पूरी तरह बेखबर थी और बेकसूर है. सुब्रत ने विशाल को पहले ही हिदायत दे रखी थी कि अगर वह कभी पुलिस के हत्थे चढ़ जाए तो सुब्रत का नाम लेने के बजाय शालू का नाम ले ले. इसी साजिश के तहत शुरुआत में जांच भटक गई थी और निर्दोष शालू को जेल जाना पड़ा था. फिलहाल पुलिस ने सुब्रत के इस खौफनाक कबूलनामे और जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.
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