एक दिन पहले सील, अगले दिन खुली बिल्डिंग..., विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के भाई की सील बिल्डिंग खुली!

सिमर चावला

25 Jun 2026 (अपडेटेड: 20 Jul 2026, 12:06 PM)

विधानसभा अध्यक्ष के भाई से जुड़ी बिल्डिंग पर कानपुर प्रशासन की कार्रवाई चर्चा में, सीलिंग और नोटिस को लेकर उठे सवाल; जाजमऊ में अवैध बेसमेंट अभियान के बीच बदला प्रशासन का बयान.

Kanpur illegal Basement Action News

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Kanpur illegal Basement Action News: लखनऊ में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश में अवैध बेसमेंट और सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाली इमारतों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जा रहा है. इसी क्रम में कानपुर विकास प्राधिकरण भी विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण और कार्रवाई कर रहा है. लेकिन जाजमऊ क्षेत्र में हुई एक कार्रवाई अब चर्चा का विषय बन गई है. कारण यह है कि जिस भवन के बेसमेंट पर अधिकारियों की मौजूदगी में कार्रवाई होने की बात सामने आई थी, वहां अगले ही दिन हालात बदले हुए दिखाई दिए. इस पूरे घटनाक्रम ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

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सुरक्षा मानकों की कमी पर हुई थी कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, कानपुर विकास प्राधिकरण ने हाल ही में जाजमऊ क्षेत्र में कई भवनों की जांच की थी. इसी दौरान एक ऐसे भवन को भी जांच के दायरे में लिया गया, जिसके बेसमेंट में कोचिंग सेंटर और रेस्टोरेंट संचालित होने की बात सामने आई. निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सुरक्षा मानकों में कमी की ओर इशारा किया. बताया गया कि भवन में आपातकालीन निकास जैसी जरूरी व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी और कोचिंग में आने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित बाहर निकलने के विकल्प सीमित थे. इन्हीं आधारों पर कार्रवाई की गई और भवन को सील किए जाने की जानकारी सामने आई. यह भवन विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के भाई बिट्टू महाना से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसके चलते मामला और अधिक चर्चा में आ गया.

एक रात में बदली तस्वीर 

कार्रवाई की खबर शहर में तेजी से फैल गई और लोगों के बीच इसकी चर्चा होने लगी. लेकिन अगले ही दिन स्थिति अलग दिखाई दी. स्थानीय स्तर पर यह जानकारी सामने आई कि भवन पर दिखाई देने वाले सीलिंग के निशान हटा दिए गए हैं. इसके बाद लोगों के बीच सवाल उठने लगे कि जिस भवन पर नियमों के उल्लंघन के आरोप में कार्रवाई हुई थी, वहां इतनी जल्दी बदलाव कैसे हो गया. जब इस संबंध में अधिकारियों से जानकारी मांगी गई तो शुरुआत में स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया. कई अधिकारी सीधे प्रतिक्रिया देने से बचते नजर आए, जिससे चर्चाओं को और बल मिला.

प्राधिकरण ने दिया नया स्पष्टीकरण

विवाद बढ़ने के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण की ओर से आधिकारिक पक्ष सामने आया. प्राधिकरण ने कहा कि भवन को सील नहीं किया गया था, बल्कि केवल नोटिस देने की कार्रवाई की गई थी. प्रशासन के इसी स्पष्टीकरण के बाद मामला और चर्चा में आ गया. क्योंकि कार्रवाई के दौरान मौजूद स्थानीय लोगों और मीडिया कर्मियों का दावा था कि मौके पर सीलिंग जैसी कार्रवाई हुई थी. कुछ तस्वीरों और वीडियो में भी कार्रवाई के निशान दिखाई देने की बात कही जा रही है. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि उन्हें प्रवर्तन अधिकारियों की ओर से नोटिस संबंधी जानकारी ही उपलब्ध कराई गई थी.

लिखी गई जानकारी भी साफ कर दी गई थी

अगले दिन जब मीडिया टीम मौके पर पहुंची तो वहां का दृश्य पहले से अलग दिखाई दिया. भवन के बाहर कार्रवाई से जुड़े जो निशान पहले दिखाई दे रहे थे, वे हट चुके थे. दीवार पर लिखी गई जानकारी भी साफ कर दी गई थी. वहीं बेसमेंट में पहले की तरह गतिविधियां चलती नजर आईं. आसपास मौजूद लोगों के बीच भी इसी विषय को लेकर चर्चा होती रही.