गरौठा में फिर खिलेगा कमल या लौटेगी साइकिल? बुंदेलखंड की इस सीट पर दिलचस्प हुआ मुकाबला... जानिए समीकरण

Garautha Assembly Seat: यूपी चुनाव 2027 से पहले झांसी की गरौठा विधानसभा सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है. बीजेपी विधायक जवाहरलाल राजपूत विकास और योगी फैक्टर के दम पर तीसरी बार जीत का दावा कर रहे हैं, जबकि सपा पीडीए फॉर्मूले पर भरोसा दिखा रही है.

यूपी तक

• 12:40 PM • 19 Jun 2026

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Garautha Assembly Seat: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले की गरौठा विधानसभा सीट पर आगामी चुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई है. यह सीट बुंदेलखंड की उन खास सीटों में से एक है जहां पिछले 4 चुनावों में 2 बार समाजवादी पार्टी (SP) और 2 बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जीत दर्ज की है. वर्तमान में इस सीट से बीजेपी के जवाहरलाल राजपूत लगातार दूसरी बार विधायक हैं. आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर दोनों ही पार्टियां अपनी जीत का दम भर रही हैं. भाजपा विधायक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन और विकास कार्यों के दम पर तीसरी बार जीत का दावा कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ सपा अपने 'पीडीए' (PDA) फॉर्मूले और बूथ स्तर की मजबूत तैयारियों के सहारे इस सीट पर दोबारा कब्जा जमाने की कोशिश में लगी हुई है.

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गरौठा सीट का सियासी इतिहास

गरौठा विधानसभा सीट पर कभी कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी (BSP) का भी काफी दबदबा रहा है. साल 2002 में यहां से बसपा ने चुनाव जीता था. इसके बाद 2007 और 2012 के चुनावों में समाजवादी पार्टी के दीप नारायण सिंह यादव ने लगातार 2 बार जीत दर्ज की थी. लेकिन 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में यहां सत्ता परिवर्तन हुआ और बीजेपी के जवाहरलाल राजपूत ने इस सीट पर लगातार 2 बार कमल खिलाया है.

बीजेपी का विकास पर जोर

बीजेपी विधायक जवाहरलाल राजपूत अपनी तीसरी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं. उन्होंने योगी सरकार के कामकाज की तारीफ करते हुए कहा है कि, 'वास्तव में गुंडा राज और अराजकता पर आदरणीय योगी जी ने खत्म किया है.' विधायक ने दावा किया है कि गरौठा में शानदार सड़कों का जाल बिछाया गया है और बेतवा व धसान नदी सहित कुल 5 पुलों का निर्माण हो रहा है. इसके साथ ही 'हर घर नल' योजना से बुंदेलखंड में पानी की समस्या भी दूर हो रही है.

सपा का 'पीडीए' पर दांव

वहीं, समाजवादी पार्टी इस बार बीजेपी को कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह से तैयार नजर आ रही है. सपा के स्थानीय नेताओं का कहना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में हार का मार्जिन काफी कम हो गया है. एक सपा नेता ने बताया है कि, 'इस बार हमारे पूरे विधानसभाओं में बूथ स्तर पर पीडीए की जो हम लोगों की रणनीति है उसके तहत काम हो रहा है.' सपा को पूरी उम्मीद है कि वह इस बार पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ देगी.

जातीय समीकरणों का अहम खेल

गरौठा सीट पर जातीय समीकरण जीत और हार तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है. आंकड़ों के अनुसार, इस सीट पर सबसे अधिक 75,000 दलित वोटर हैं. इसके अलावा करीब 45,000 ठाकुर, 45,000 ब्राह्मण, 35,000 पटेल, 30,000 कुशवाहा, 20,000 मुस्लिम, 20,000 वैश्य और 5,000 यादव मतदाता हैं. दलित, यादव और मुस्लिम वोट बैंक के साथ अन्य जातियों का बंटवारा ही यह तय करेगा कि सपा को फायदा होगा या फिर बीजेपी बाजी मारेगी.

क्या कहते हैं स्थानीय पत्रकार?

इस दिलचस्प चुनावी मुकाबले पर स्थानीय पत्रकारों की राय भी काफी अहम मानी जा रही है. पत्रकारों का मानना है कि इस समय बीजेपी का पलड़ा जरूर भारी है, लेकिन इसकी असली वजह मौजूदा विधायक नहीं बल्कि सीएम योगी हैं. एक स्थानीय पत्रकार ने कहा है कि, 'केवल और केवल बाबा जी के आधार पर गरोठा विधानसभा सीट को भारतीय जनता पार्टी जीतेगी.' हालांकि, उनका यह भी कहना है कि अगर सपा जातीय समीकरणों को साधकर सही कैंडिडेट उतारती है, तो यह चुनाव बेहद रोमांचक होने वाला है.