FIR से नाम हटाने के बदले मांग रहे थे रिश्वत... झांसी में दरोगा और सिपाही एंटी करप्शन टीम के जाल में फंसे!

यूपी तक

• 04:01 PM • 08 Jul 2026

Jhansi Bribery Case: उत्तर प्रदेश के झांसी में एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक दरोगा और सिपाही को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. आरोप है कि दोनों पुलिसकर्मी मुकदमे से नाम हटाने के बदले पहले 60 हजार रुपये ले चुके थे और फिर 10 हजार रुपये की मांग कर रहे थे.

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Jhansi Bribery Case: उत्तर प्रदेश पुलिस का स्लोगन है "सुरक्षा आपकी, संकल्प हमारा", लेकिन जब वर्दी पहनने वाले ही रिश्वत के आरोपों में घिर जाएं तो सवाल खड़े होना लाजिमी है. झांसी में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एंटी करप्शन टीम ने एक दरोगा और सिपाही को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. आरोप है कि दोनों पुलिसकर्मी एक मुकदमे से नाम हटाने के एवज में पैसों की मांग कर रहे थे. शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया और कार्रवाई करते हुए दोनों को पकड़ लिया.

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मामला झांसी शहर कोतवाली क्षेत्र की बड़ागांव गेट चौकी का है. यहां तैनात चौकी प्रभारी दरोगा ओमकार और उनके साथ तैनात एक सिपाही पर रिश्वत लेने का आरोप लगा है. फिलहाल दोनों के खिलाफ सदर बाजार थाने में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.

मुकदमे से नाम हटाने के लिए मांगे गए थे पैसे

जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता संजीव राय ने एंटी करप्शन टीम से शिकायत की थी कि उनके दो बेटों और तीन दोस्तों के नाम करीब दो महीने पहले एक मुकदमे में दर्ज कर दिए गए थे. संजीव राय का कहना था कि जिस समय विवाद हुआ था, उस समय उनके बेटे और दोस्त मौके पर मौजूद ही नहीं थे.

उन्होंने पुलिस को इस संबंध में सबूत भी दिए थे. शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्होंने सीसीटीवी फुटेज की पेनड्राइव उपलब्ध कराई थी, जिसमें अलग-अलग कमरों की रिकॉर्डिंग थी और यह दिखाया गया था कि घटना के समय उनके बेटे और अन्य लोग घर पर मौजूद थे. इसके बाद पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर नाम हटाने के बदले पैसे की मांग शुरू कर दी.

पहले लिए 60 हजार रुपये, फिर मांगे 10 हजार और

शिकायतकर्ता संजीव राय ने आरोप लगाया कि मुकदमे से नाम हटाने के नाम पर दरोगा और सिपाही ने पहले उनके बच्चों को बुलाया और उनसे करीब 60 हजार रुपये ले लिए. कुछ दिन बाद फिर से पैसों की मांग की जाने लगी.

आरोप है कि पुलिसकर्मी एक व्यक्ति के नाम हटाने के बदले करीब 10 हजार रुपये मांग रहे थे. शिकायतकर्ता का कहना है कि पहले पैसे लेने के बाद भी उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा था और दोबारा रकम मांगी जा रही थी. लगातार दबाव और कथित रिश्वत की मांग से परेशान होकर संजीव राय ने एंटी करप्शन टीम से संपर्क किया.

फेसबुक से मिली एंटी करप्शन टीम की जानकारी, फिर बनाई गई योजना

शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्हें फेसबुक के जरिए एंटी करप्शन टीम के बारे में जानकारी मिली थी. इसके बाद उन्होंने टीम से संपर्क किया और पूरी घटना बताई.

शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने पूरी योजना तैयार की. टीम ने शिकायतकर्ता को तय प्रक्रिया के तहत पैसे दिए और पुलिसकर्मियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया.

चौकी पर बुलाकर लिए पैसे, तभी पहुंच गई टीम

शिकायतकर्ता के अनुसार, दरोगा ओमकार ने उन्हें फोन करके दो बार घर आने की बात कही थी. लेकिन उन्होंने पुलिसकर्मी को घर बुलाने से मना कर दिया और चौकी आने को कहा.

इसके बाद वह बड़ागांव गेट चौकी पहुंचे, जहां पैसे देने की बात तय हुई थी. आरोप है कि जैसे ही रिश्वत की रकम दी गई, एंटी करप्शन टीम ने मौके पर पहुंचकर दरोगा और सिपाही को पकड़ लिया. शिकायतकर्ता ने बताया कि पैसे दरोगा ओमकार को दिए गए थे. इसके बाद दरोगा ने वही रकम सिपाही को पकड़ाई थी, जिसके बाद टीम ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया.

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ रिश्वत कांड का वीडियो

इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो वायरल होने के बाद झांसी पुलिस ने भी मामले को लेकर जानकारी साझा की है.

झांसी पुलिस की ओर से बताया गया कि प्रकरण के संबंध में थाना सदर बाजार में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है. फिलहाल मौके पर शांति व्यवस्था सामान्य है.

दरोगा और सिपाही के खिलाफ कार्रवाई जारी

एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई के बाद दोनों पुलिसकर्मियों पर कानूनी शिकंजा कस गया है. रिश्वत लेने के आरोप में दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है.

यह मामला एक बार फिर पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई को सामने लाता है. शिकायतकर्ता की सतर्कता और एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई से कथित रिश्वतखोरी का यह मामला उजागर हुआ है. फिलहाल जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की आगे की स्थिति साफ हो सकेगी.