नोएडा के औद्योगिक हब से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. श्रमिकों के न्यूनतम वेतन (Minimum Wages) में वृद्धि और ओवरटाइम के बढ़ते बोझ के बाद अब यहाँ की फैक्ट्रियों ने अपनी कार्यशैली में एक क्रांतिकारी बदलाव करने का निर्णय लिया है. नोएडा की औद्योगिक इकाइयों में अब 'ओवरटाइम' की परंपरा खत्म होने जा रही है और इसकी जगह 'डबल शिफ्ट सिस्टम' लागू किया जाएगा.
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ओवरटाइम की छुट्टी, अब दो शिफ्ट में होगा काम
श्रमिक आंदोलन के बाद गठित हाई पावर कमेटी के फैसलों ने उद्योगों की रणनीति बदल दी है. अब कंपनियों ने ओवरटाइम के लिए दोगुना भुगतान करने के बजाय दो अलग-अलग शिफ्ट में काम कराने का फैसला किया है:
- पहली शिफ्ट: सुबह 6:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक.
- दूसरी शिफ्ट: दोपहर 2:00 बजे से रात 10:00 बजे तक.
- इस नई व्यवस्था से औद्योगिक इकाइयां दिन में कुल 16 घंटे तक उत्पादन कर सकेंगी. बिजली आपूर्ति और अन्य लागतों का आकलन शुरू कर दिया गया है ताकि उत्पादन की गति प्रभावित न हो.
नई नौकरियां और मई 2026 की डेडलाइन
नोएडा की कई कंपनियों ने इस सिस्टम पर काम शुरू कर दिया है और मई 2026 तक इसे पूरी तरह से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है. इस बदलाव का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि दूसरी शिफ्ट को चलाने के लिए कंपनियां अब बड़े पैमाने पर अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती कर रही हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं.
लागत कम करना है मकसद
नोएडा एंटरप्रेन्योर एसोसिएशन (NEA) के उपाध्यक्ष सुधीर श्रीवास्तव के अनुसार, न्यूनतम वेतन बढ़ने के बाद उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है. बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए ओवरटाइम को खत्म कर दो शिफ्ट का फॉर्मूला सबसे कारगर है. इससे उद्यमियों की लागत नियंत्रित होगी और श्रमिकों को भी काम के नए अवसर मिलेंगे.
प्रशासन की सख्ती और सुरक्षा
हालिया आंदोलनों को देखते हुए सरकार और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हैं. अराजक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की गई है ताकि भविष्य में औद्योगिक शांति भंग न हो. प्रदेश के उच्च अधिकारियों ने उद्यमियों और श्रमिकों, दोनों पक्षों की बात सुनकर एक बीच का रास्ता निकाला है, जिससे नोएडा का औद्योगिक पहिया सुचारू रूप से चलता रहे.
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