कौन है बरेली के DM अविनाश सिंह? जिन्होंने रेहान खान का किया डिमोशन, क्लर्क से बनाया चपरासी!

यूपी तक

• 01:15 PM • 19 Sep 2026

बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह अपने एक सख्त प्रशासनिक फैसले को लेकर इन दिनों खूब चर्चा में हैं. उन्होंने शासनादेश का सख्ती से पालन करते हुए एक क्लर्क को चपरासी के पद पर डिमोट कर दिया है. रेहान खान नाम का यह कर्मचारी मृतक आश्रित कोटे से भर्ती हुआ था.

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उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के जिलाधिकारी अविनाश सिंह इन दिनों अपने एक फैसले को लेकर सुर्खियों में हैं. उन्होंने एक कनिष्ठ लिपिक (क्लर्क) का डिमोशन करके उसे पल भर में क्लर्क से चपरासी (चतुर्थ श्रेणी) बना दिया है. डीएम के इस फैसले की पूरे जिले में चर्चा है.
 

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जौनपुर जिले के रहने वाले अविनाश सिंह 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. उन्हें प्रांतीय सिविल सेवा (SCS) से आईएएस कैडर में प्रमोट किया गया है. अविनाश सिंह का जन्म 10 जून 1970 में हुआ है. उन्होंने प्राचीन इतिहास (Ancient History) में एमए (M.A) की डिग्री हासिल की है. अविनाश सिंह को 31 अगस्त 2020 को आधिकारिक तौर पर आईएएस के रूप में नियुक्ति मिली थी.
 

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DM अविनाश सिंह 21 अप्रैल 2025 से बरेली के जिलाधिकारी का पद संभाल रहे हैं और उनका प्रशासनिक ट्रैक रिकॉर्ड काफी शानदार रहा है. बरेली से पहले वह अंबेडकर नगर के डीएम, गोरखपुर के नगर आयुक्त और मिर्जापुर में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां पूरी ईमानदारी के साथ निभा चुके हैं.
 

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डीएम अविनाश सिंह अपने सख्त मिजाज और नियमों के पक्के अधिकारी माने जाते हैं. उन्होंने हाल ही में शासनादेश का कड़ाई से पालन करते हुए क्लर्क रेहान खान नाम के कर्मचारी पर शख्त कार्रवाई की है. रेहान खान को 5 जुलाई 2021 में मीरगंज तहसील में मृतक आश्रित कोटे के तहत क्लर्क की सरकारी नौकरी मिली थी.
 

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नियमों के अनुसार, क्लर्क पद के लिए हिंदी टाइपिंग की परीक्षा पास करना जरूरी होता है. डीएम ने रेहान खान को हिंदी टाइपिंग की परीक्षा पास करने के लिए कई मौके दिए थे. उसने 25 सितंबर 2023, 21 जून 2024 और आखिरी बार 8 सितंबर 2026 को परीक्षा दी थी, लेकिन वह तीनों बार टाइपिंग टेस्ट में फेल हो गया था.
 

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लगातार तीन बार टाइपिंग टेस्ट में फेल होने के बाद डीएम अविनाश सिंह ने 16 सितंबर 2026 को सख्त आदेश जारी कर दिया. इस आदेश के तहत रेहान खान को क्लर्क के पद से हटाकर चपरासी बना दिया गया है. बरेली कलेक्ट्रेट में यह अपनी तरह का पहला मामला है, जिसकी हर तरफ तारीफ हो रही है.
 

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डीएम के इस एक्शन के बाद कलेक्ट्रेट के बाकी कर्मचारियों में खौफ का माहौल है. इसके साथ ही उन्होंने बाकी कर्मचारियों को भी सख्त वार्निंग दी है. डीएम ने राहुल कुमार, लक्ष्मी सक्सेना, कंचित चौधरी और नेहा जोशी को टाइपिंग सीखने के लिए 2 महीने की मोहलत दी है. अगर ये भी फेल हुए तो इन पर भी डीएम का डंडा चलना तय है.
 

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