लेखपाल भर्ती का फॉर्म भरने वाले अभ्यर्थियों का मुद्दा उठाकर नवीन सर ने लगाए ये बड़े आरोप

UP Lekhpal Recruitment 2026: उत्तर प्रदेश में 7994 पदों पर निकली लेखपाल भर्ती आवेदन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी और पेमेंट संबंधी समस्याओं को लेकर विवादों में है. कई अभ्यर्थियों का आरोप है कि वेबसाइट क्रैश और बैंकिंग दिक्कतों के कारण वे फीस जमा नहीं कर सके और प्रक्रिया से बाहर हो गए. शिक्षक से नेता बने नवीन शर्मा ने छात्रों की आवाज उठाते हुए आवेदन तिथि बढ़ाने की मांग की है.

UP Lekhpal Recruitment 2026: उत्तर प्रदेश में नई भर्तियों और चल रही भर्तियों को लेकर उठते सवालों के बीच लेखपाल भर्ती एक बार फिर चर्चा में है. 7994 पदों पर निकली इस भर्ती में आवेदन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी दिक्कतों और भुगतान संबंधी समस्याओं को लेकर अभ्यर्थियों ने गंभीर आपत्ति जताई है. छात्रों की इन समस्याओं को लेकर शिक्षक और हाल ही में समाजवादी पार्टी से जुड़े नवीन शर्मा ने बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आवेदन पत्र भरने के बाद भुगतान न हो पाने के कारण प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं और अब उनकी सुनवाई नहीं हो रही है.

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आवेदन प्रक्रिया में आई तकनीकी दिक्कतें

नवीन शर्मा के अनुसार, लेखपाल भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की लास्ट डेट 28 जनवरी थी. कई अभ्यर्थियों का कहना है कि अंतिम दिनों में वेबसाइट क्रैश हो गई, जिसके कारण वे भुगतान प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके. उनका आरोप है कि यह अभ्यर्थियों की गलती नहीं बल्कि तकनीकी या बैंकिंग सिस्टम की समस्या थी.

नवीन शर्मा का कहना है कि जिन छात्रों का आवेदन अधूरा रह गया, वे पिछले एक महीने से डेट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय तक गुहार लगाई, यहां तक कि कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया. बताया जा रहा है कि अदालत में भी इस मामले को उठाया गया जहां जज ने छात्रों के पक्ष में फॉर्म भरवाने पर विचार करने की बात कही लेकिन संबंधित पक्ष ने इसे बैंकिंग सिस्टम की विफलता बताते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया. 

भर्ती से जुड़ी डिटेल्स 

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने लेखपाल के कुल 7994 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया है. विज्ञापन जारी होने के बाद आरक्षण व्यवस्था, खासकर ओबीसी वर्ग को दिए गए पदों को लेकर विवाद सामने आया था. इस मुद्दे के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप पर आयोग ने संशोधित श्रेणीवार पदों का विवरण जारी किया. संशोधित आंकड़ों के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए 3205 पद, ओबीसी के लिए 2158 पद, अनुसूचित जाति (एससी) के लिए 1089 पद, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 792 पद और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए 160 पद निर्धारित किए गए हैं। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 28 जनवरी 2026 तक चली जबकि आवेदन पत्र में संशोधन (करेक्शन) के लिए विंडो 4 फरवरी 2026 तक खुली रखी गई थी.

चयन प्रक्रिया और पात्रता

लेखपाल भर्ती में वही अभ्यर्थी शामिल हो सकते हैं जिन्होंने प्रारंभिक पात्रता परीक्षा (PET) पास की है. PET स्कोर के आधार पर अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा. इसके बाद मुख्य लिखित परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन के आधार पर लास्ट मेरिट लिस्ट तैयार होगी. इसके आलावा आयु सीमा 18 से 40 वर्ष तय की गई है.

छात्रों की आवाज और राजनीतिक संदर्भ

नवीन शर्मा का कहना है कि सालों  से लेखपाल भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह अवसर बेहद महत्वपूर्ण था. ऐसे में तकनीकी कारणों से उनका आवेदन रुक जाना उनके भविष्य पर सीधा असर डालता है. उन्होंने खुद को छात्रों की आवाज बताते हुए इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया.  

22 फरवरी को नवीन शर्मा समाजवादी पार्टी में  शामिल हुए. इस अवसर पर पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी मंच पर मौजूद थे. मंच से संबोधित करते हुए नवीन शर्मा ने कहा कि वे एक शिक्षक हैं और निर्माण की राजनीति में विश्वास रखते हैं, न कि विध्वंस की. उन्होंने वर्तमान सरकार पर विभाजनकारी राजनीति का आरोप लगाया और समाजवादी विचारधारा को जोड़ने वाली राजनीति बताया. 

उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग डेढ़ करोड़ छात्र हैं और वे गांव-गांव जाकर युवाओं की समस्याएं सुन रहे हैं. उन्होंने “यूथ सपा का, बूथ सपा का” का नारा देते हुए 2027 के चुनाव में अखिलेश यादव को मजबूत बनाने की अपील की. साथ ही यह भी कहा कि अनुकूल या प्रतिकूल परिस्थितियों में वे आजीवन समाजवादी पार्टी के साथ रहेंगे. 

अब आगे क्या?

लेखपाल भर्ती को लेकर भुगतान संबंधी समस्याओं का मुद्दा अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा में है. अभ्यर्थी तिथि विस्तार और आवेदन का मौका दोबारा देने की मांग कर रहे हैं. पुलिस या जांच एजेंसियों का मामला न होकर यह प्रशासनिक और तकनीकी मुद्दा है लेकिन छात्रों की बढ़ती नाराजगी इसे बड़ा मुद्दा बना सकती है. अब देखना यह होगा कि आयोग या राज्य सरकार इस मामले में क्या निर्णय लेती है और क्या प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत मिल पाती है या नहीं. 

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