मैनपुरी में हाल ही में रिलीज होने वाली फिल्म "यादव जी की लव स्टोरी" को लेकर विवाद गरमा गया है. यादव महासभा ने इस फिल्म के टाइटल और विषय वस्तु पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे बैन करने की मांग की है. यादव महासभा के युवा जिला अध्यक्ष शुभम यादव का कहना है कि फिल्म के टाइटल में 'यादव जी' शब्द का इस्तेमाल पूरे समाज को बदनाम करने की कोशिश है. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि फिल्म की कहानी में कुछ गलत नहीं है, तो 'यादव जी' का ही नाम क्यों चुना गया? क्या यह केवल विवाद पैदा कर फिल्म को हिट कराने का फॉर्मूला है?
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'घूसखोर पंडित' फिल्म से तुलना
प्रदर्शनकारियों ने हाल ही में हुए "घूसखोर पंडित" फिल्म के विवाद का भी जिक्र किया. उनका कहना है कि यदि उस समय प्रोडक्शन हाउस और निर्देशकों पर कड़ी कार्रवाई हुई होती, तो आज किसी और समाज को निशाना बनाने की हिम्मत नहीं होती. महासभा के पदाधिकारियों का आरोप है कि फिल्म के टीजर में 'लव जिहाद' जैसे संवेदनशील और "कैची" मुद्दों को दिखाया गया है, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा है. उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म में मुख्य पात्रों का चित्रण इस तरह किया गया है जिससे दो समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़े.
सेंसर बोर्ड पर सवाल
प्रदर्शनकारियों ने सेंडर बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि बोर्ड को यह देखना चाहिए कि किसी फिल्म के टाइटल या कंटेंट से किसी समाज की संवेदनशीलता को चोट तो नहीं पहुंच रही है. यादव महासभा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि फिल्म का टाइटल नहीं बदला गया या इसे बैन नहीं किया गया, तो वे मैनपुरी जिले के किसी भी सिनेमाघर में इस फिल्म को नहीं चलने देंगे. उन्होंने इसके लिए जिलाधिकारी (DM) को ज्ञापन भी सौंपा है और पूरे प्रदेश स्तर पर विरोध प्रदर्शन की बात कही है.
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