2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन के भीतर एक नया सियासी घमासान शुरू होता नजर आ रहा है. इस बार विवाद के केंद्र में हैं पूर्व मंत्री और अपनी जनता पार्टी के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य. अक्टूबर की शुरुआत में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपनी पार्टी को इंडिया गठबंधन में शामिल करने का ऐलान किया था. लेकिन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें गठबंधन में लेने से साफ इनकार कर दिया है. अखिलेश ने स्पष्ट कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य उनकी सीटों की गिनती में बिल्कुल शामिल नहीं होंगे. इस पर कांग्रेस की तरफ से भी करारा जवाब आया है, जिससे सपा और कांग्रेस के बीच टेंशन बढ़ती हुई दिखाई दे रही है.
ADVERTISEMENT
अखिलेश यादव ने गठबंधन से किया इनकार
शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब अखिलेश यादव से स्वामी प्रसाद मौर्य के इंडिया गठबंधन में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने सख्त लहजे में इसका जवाब दिया. अखिलेश ने कहा, "वह हमारे गठबंधन में शामिल नहीं होंगे. वह हमारी सीटों की गिनती में शामिल नहीं हो सकते." इससे पहले भी स्वामी प्रसाद मौर्य लगातार अखिलेश यादव पर निशाना साधते रहे हैं. राहुल गांधी से मुलाकात के बाद उन्होंने अखिलेश पर तंज कसते हुए कहा था कि वह सड़कों पर नहीं, केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए लड़ते हैं और जो अध्यक्ष 'डी' का मतलब डिंपल यादव और दलित के बीच खुद कंफ्यूज हो, वह पार्टी को क्या दिशा दिखाएगा.
कांग्रेस ने किया स्वामी प्रसाद का स्वागत
अखिलेश यादव के इस सख्त बयान के बाद कांग्रेस की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि इंडिया गठबंधन को मजबूत करने की प्रक्रिया चल रही है और जो भी लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखता है, उसका गठबंधन में स्वागत है. अखिलेश के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गौतम ने कहा कि "यह उनकी निजी राय हो सकती है." इस बयान से साफ जाहिर होता है कि कांग्रेस स्वामी प्रसाद मौर्य को साथ लेकर चलने के मूड में है, जिससे सपा और कांग्रेस के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है.
स्वामी प्रसाद मौर्य का बदलता राजनीतिक सफर
स्वामी प्रसाद मौर्य का राजनीतिक सफर कई पार्टियों से होकर गुजरा है. वह कभी मायावती के करीबी थे और बसपा के कद्दावर नेता माने जाते थे. 2017 में वह बीजेपी में शामिल हुए और योगी सरकार में मंत्री बने. 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने बीजेपी छोड़कर सपा का दामन थाम लिया, लेकिन वह चुनाव हार गए. अखिलेश यादव ने उन्हें एमएलसी बनाया, लेकिन रामचरितमानस पर उनके विवादित बयान के बाद पार्टी में उनके खिलाफ विरोध शुरू हो गया. फरवरी 2024 में उन्होंने विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया और अपनी अलग 'अपनी जनता पार्टी' बना ली. अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस के समर्थन के बाद क्या वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा बन पाते हैं या नहीं.
ADVERTISEMENT










