सपा में शामिल हो चुके सिनोद कुमार शाक्य को BJP ने कार्यसमिति की लिस्ट में दे दी जगह, पार्टी की लिस्ट से मचा बवाल

यूपी तक

• 11:43 AM • 27 Oct 2026

उत्तर प्रदेश के बदायूं में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को उस वक्त असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब पार्टी की ओर से जारी कार्यसमिति की सूची में सिनोद कुमार शाक्य का नाम शामिल मिला.

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Badaun Sinod Kumar Shakya: उत्तर प्रदेश के बदायूं में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को उस वक्त असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब पार्टी की ओर से जारी कार्यसमिति की सूची में सिनोद कुमार शाक्य का नाम शामिल मिला. बताया गया कि सिनोद कुमार शाक्य पहले ही समाजवादी पार्टी (SP) में शामिल हो चुके थे. ऐसे में पार्टी की सूची में उनका नाम होने से संगठन की तैयारी और जानकारी को लेकर सवाल उठने लगे. बदायूं और आसपास के इलाकों में भाजपा तथा सपा के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज होती दिख रही है. इस घटनाक्रम को बरेली मंडल की राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है.

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कार्यसमिति की सूची में नाम आने से BJP की किरकिरी

भाजपा ने हाल ही में कार्यसमिति की सूची जारी की थी. इसमें सिनोद कुमार शाक्य का नाम शामिल था, जबकि दी गई जानकारी के मुताबिक वह पहले ही सपा का दामन थाम चुके थे. इस घटनाक्रम से पार्टी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा. सवाल उठ रहे हैं कि सूची तैयार करते समय नेताओं की मौजूदा राजनीतिक स्थिति की जानकारी क्यों नहीं जुटाई गई. हालांकि, इस मामले में भाजपा की ओर से किसी आधिकारिक स्पष्टीकरण की जानकारी उपलब्ध नहीं है.

BJP छोड़कर सपा में शामिल हुए कई नेता

बदायूं और बरेली मंडल के राजनीतिक समीकरणों में सपा अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. दी गई जानकारी के अनुसार, सिनोद कुमार शाक्य के अलावा सिनोद कुमार शाक्य, दारा सिंह प्रजापति और धर्मेंद्र कश्यप जैसे नेता भी भाजपा से जुड़ने के बाद सपा में शामिल हुए हैं. इन नेताओं के पार्टी बदलने को भाजपा के लिए राजनीतिक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, इन बदलावों का चुनावी असर कितना होगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट हो सकेगा.

बदायूं में जातीय समीकरण भी अहम

बदायूं की राजनीति में जातीय समीकरणों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है. जानकारी के मुताबिक, सपा दलित, शाक्य, कश्यप और जाटव जैसे वर्गों के बीच अपना समर्थन बढ़ाने की कोशिश कर रही है. इन समुदायों से जुड़े नेताओं के पार्टी में शामिल होने से स्थानीय राजनीतिक मुकाबले पर असर पड़ सकता है. भाजपा के लिए अपने समर्थक वर्गों के बीच पकड़ बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा. हालांकि, किसी समुदाय के पूरे वोट बैंक के एकतरफा रूप से प्रभावित होने का निष्कर्ष केवल इन घटनाओं के आधार पर नहीं निकाला जा सकता.

BJP के संगठनात्मक कामकाज पर उठे सवाल

कार्यसमिति की सूची में पार्टी छोड़ चुके नेता का नाम शामिल होने से सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं. राजनीतिक संगठन में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की मौजूदा स्थिति की जानकारी रखना अहम होता है. ऐसे में सिनोद कुमार शाक्य का नाम सूची में शामिल होना भाजपा के लिए असहज स्थिति बन गया.

बरेली मंडल में सपा और भाजपा के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा

बदायूं बरेली मंडल का हिस्सा है और यहां भाजपा तथा सपा के बीच राजनीतिक मुकाबला लगातार चर्चा में है. सपा में भाजपा से जुड़े रहे नेताओं के शामिल होने से स्थानीय राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है. बदायूं में जातीय समीकरण और नेताओं का दल बदलना दोनों ही राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं. अब यह देखना होगा कि भाजपा इस घटनाक्रम के बाद संगठनात्मक स्तर पर क्या कदम उठाती है और सपा इन बदलावों को अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने में किस तरह इस्तेमाल करती है.