बेटी के साथ धर्मेंद्र कश्यप ने छोड़ी बीजेपी, SP में शामिल होते ही कीर्ति कश्यप को मिल गया विधानसभा का टिकट

यूपी तक

• 04:13 PM • 29 Oct 2026

Dharmendra Kashyap: बरेली की सियासत में बड़ा बदलाव हुआ है. पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप और उनकी बेटी कीर्ति कश्यप बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गई हैं. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कीर्ति कश्यप को बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से प्रत्याशी घोषित किया है.

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Dharmendra Kashyap: उत्तर प्रदेश की सियासत में खासकर बरेली जिले में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप और उनकी बेटी कीर्ति कश्यप ने भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है. पार्टी में शामिल होते ही सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कीर्ति कश्यप को बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी भी घोषित कर दिया है. कीर्ति के सपा में शामिल होने से यह साफ हो गया है कि यह मामला सिर्फ पार्टी बदलने का नहीं है, बल्कि सम्मान, सियासी जमीन और 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी का भी है. कीर्ति ने साफ किया है कि जहां सम्मान नहीं मिलता, वहां रहने का कोई मतलब नहीं है.

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कीर्ति को मिला बिथरी चैनपुर से टिकट

कीर्ति कश्यप के सपा में आते ही अखिलेश यादव ने उन्हें बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाने का ऐलान कर दिया है. कीर्ति ने बताया कि 4 जून 2024 को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही उन्होंने विधानसभा चुनावों की अपनी तैयारी शुरू कर दी थी. उनके साथ बरेली से बड़ी संख्या में उनके समर्थक और कार्यकर्ता भी लखनऊ पहुंचे थे और सपा में शामिल हुए. 

सपा को मिला मजबूत सियासी समीकरण

सपा मुखिया अखिलेश यादव का मानना है कि धर्मेंद्र कश्यप और उनकी बेटी के आने से न सिर्फ बरेली, बल्कि आस-पास के जिलों और पूरे प्रदेश में पार्टी की ताकत काफी बढ़ेगी. अखिलेश यादव लगातार पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं और कश्यप परिवार का सपा में आना भी इसी रणनीति का एक बड़ा हिस्सा माना जा रहा है. अखिलेश यादव ने कहा कि अब जो लोग सपा में आ गए हैं, उन्हें पूरा सम्मान और ताकत दी जाएगी, ताकि वे कभी पार्टी छोड़कर न जाएं.

बीजेपी के खिलाफ होगा कड़ा मुकाबला

इससे पहले अखिलेश यादव अयोध्या से पवन पांडे को भी अपना प्रत्याशी घोषित कर चुके हैं. अब बिथरी चैनपुर से कीर्ति कश्यप का नाम सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि सपा अपने चुनावी पत्ते धीरे-धीरे खोल रही है. अब सबसे दिलचस्प बात यह होगी कि बीजेपी से सपा में आए धर्मेंद्र कश्यप और कीर्ति कश्यप अपनी पुरानी पार्टी के खिलाफ मैदान में उतरेंगे. यह देखना भी अहम होगा कि क्या पिता का राजनीतिक अनुभव और समर्थकों की ताकत कीर्ति को चुनाव में जीत दिला पाएगी या फिर बीजेपी उन्हें कड़ी चुनौती देगी.