उत्तर प्रदेश के एमएलसी चुनाव में इस बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. जीत के बाद अक्सर जश्न और हंगामे के लिए जानी जाने वाली समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता इस बार पूरी तरह से अनुशासन में नजर आए. पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को यह अच्छी तरह से मालूम था कि जीत के बाद कार्यकर्ता अक्सर जज्बात में आकर हंगामा करते हैं, जिसका फायदा बीजेपी उठा सकती है और सपा को 'अराजक' पार्टी बता सकती है. इसलिए इस बार अखिलेश यादव ने खुद कमान संभाली और कार्यकर्ताओं को अनुशासन में रहने का सख्त निर्देश दिया. उनका यह दांव सफल रहा और बीजेपी के हाथ से सपा को बदनाम करने का मौका निकल गया. खास बात यह भी रही कि 11 सीटों में से भले ही बीजेपी ने 6 और सपा ने 5 सीटें जीती हों, लेकिन वोट प्रतिशत और वोटों की गिनती में सपा, बीजेपी से आगे रही है.
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वोटों में बीजेपी से आगे रही सपा
ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस एमएलसी चुनाव में स्नातक और शिक्षक सीटों के लिए कुल 14,81,310 वोट डाले जाने थे. इनमें स्नातक क्षेत्र की पांच सीटों के लिए 11,85,706 और शिक्षक खंड की छह सीटों के लिए 2,89,546 मतदाता थे. मतदान का प्रतिशत 55.54 रहा, जिसमें करीब 8 लाख लोगों ने वोट डाला. भले ही सपा ने 5 सीटें जीतीं, लेकिन पार्टी को बीजेपी से 3,123 वोट ज्यादा मिले. सीटों के मामले में पिछड़ने के बावजूद, वोटों के लिहाज से सपा बीजेपी से आगे रही.
वाराणसी में दिखा गजब का अनुशासन
सपा के अनुशासन का सबसे बड़ा इम्तिहान प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हुआ. यहां सपा के दोनों उम्मीदवारों ने बड़ी जीत हासिल की. आशुतोष सिन्हा ने पहली ही वरीयता में 15,000 वोटों की बढ़त ले ली थी. इसके बावजूद जब बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया और रीकाउंटिंग की मांग की, तब भी सपा कार्यकर्ता पूरी तरह से शांत रहे. अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं को सख्त हिदायत दी थी कि कोई भी जश्न, जोश या जुलूस नहीं निकाला जाएगा, क्योंकि इससे विरोधी दल फायदा उठा सकते हैं.
रात भर मतगणना केंद्र पर डटे रहे सपा नेता
अखिलेश यादव ने न सिर्फ कार्यकर्ताओं को शांत रखा, बल्कि उन्हें मतगणना केंद्र पर डटे रहने का आदेश भी दिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर उन सभी नेताओं की तस्वीरें शेयर कीं, जो केंद्र के बाहर कुर्सियां लगाकर बैठे थे. रात के करीब 11 बजे अखिलेश ने चंदौली के सांसद को वीडियो कॉल करके खुद जायजा लिया कि कौन-कौन नेता वहां मौजूद हैं. इससे कार्यकर्ताओं में यह संदेश गया कि पार्टी अध्यक्ष खुद उन पर नजर रख रहे हैं. अखिलेश का यह 'हठयोग' सफल रहा और अगर सपा आगे भी यही अनुशासन बनाए रखती है, तो बीजेपी के हाथ से एक बड़ा चुनावी मुद्दा हमेशा के लिए निकल सकता है.
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