शीश महल और स्विमिंग पूल वाले आरोपों पर भड़क गए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, चुन-चुन कर दिया ये जवाब

Shankaracharya Avimukteshwaranand Reaction:ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मठ में शीश महल, स्विमिंग पूल और अन्य आरोपों पर कैमरे के सामने सफाई दी. उन्होंने इन आरोपों को 'फिक्शन' बताया और पुलिस जांच की गोपनीयता भंग होने पर सवाल उठाए.

यूपी तक

• 01:26 PM • 27 Feb 2026

follow google news

Shankaracharya Avimukteshwaranand Reaction: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हाल ही में अपने ऊपर लगे गंभीर आरोपों और पुलिस जांच को लेकर चुप्पी तोड़ी ह.। एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने मठ की संरचना, कथित विलासिता और अपने ऊपर दर्ज कानूनी मामलों पर बेबाक जवाब दिए. उन्होंने इन आरोपों को एक सोची-समझी साजिश और फिक्शन करार देते हुए कहा कि सत्य की जीत अदालत में होगी.

यह भी पढ़ें...

शीश महल और स्विमिंग पूल का सच

मठ में शीश महल और 'स्विमिंग पूल' होने के दावों पर शंकराचार्य ने कहा कि शीशे लगे होना पारदर्शिता का प्रतीक है ताकि बाहर से भी सब कुछ साफ दिखे और कोई गोपनीयता न रहे. स्विमिंग पूल के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह उनके गुरुजी (ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती) के स्वास्थ्य और व्यायाम के लिए वैद्यों की सलाह पर बनाया गया एक छोटा ढांचा था जिसे उनके ब्रह्मलीन होने के साथ ही समाप्त कर दिया गया था.

जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर सवाल

शंकराचार्य ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आश्चर्य जताया कि जो जांच रिपोर्ट गोपनीय होनी चाहिए वह एक 'हिस्ट्रीशीटर' या शिकायतकर्ता के माध्यम से सार्वजनिक कैसे हो रही है. उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें अपना परमानेंट प्रवक्ता बना लिया है? 

गिरफ्तारी और सुरक्षा का डर

अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) लेने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें खुद का कोई डर नहीं है. लेकिन वे एक संस्था (मठ) का प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्होंने अतीत की घटनाओं का हवाला देते हुए अंदेशा जताया कि जेल में ले जाकर 'जहर की सुई' जैसे षड्यंत्र रचे जा सकते हैं. इसलिए अनुयायियों की भावनाओं और अपनी सुरक्षा के लिए कानूनी बचाव का रास्ता चुना गया है.इस दौरान उन्होंने इशारों में कहा कि यह सब कुछ उन्हें बदनाम करने के लिए किया जा रहा है. उन्होंने 'एस्टीन फाइल' का जिक्र करते हुए दावा किया कि विश्व स्तर पर चल रही किसी बड़ी चर्चा से ध्यान भटकाने के लिए भारत में शंकराचार्य के मामले को तूल दिया जा रहा है.