उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दौरान एक हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला. विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना विपक्षी और सत्तापक्ष के विधायकों के बीच हो रहे हंगामे से इतने नाराज हो गए कि उन्होंने अपना हेडफोन फेंक दिया और सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी.
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विवाद की शुरुआत: रागिनी सोनकर का भाषण
मछली शहर से सपा विधायक रागिनी सोनकर ने युवाओं के रोजगार और भर्तियों में बैकलॉग का मुद्दा काफी आक्रामक तरीके से उठाया. उन्होंने शायराना अंदाज में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि युवा न ठीक से सो पा रहा है और न रो पा रहा है. उन्होंने सवाल किया कि विभागों में कुल कितने पद रिक्त हैं और सरकार उन्हें कब तक भरेगी.
इसपर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने जवाब देते हुए कहा कि 2017 से अब तक 47,407 पदों पर चयन की कार्यवाही पूरी की गई है और आरक्षण के नियमों का पालन हो रहा है. रागिनी सोनकर और अन्य सपा विधायक (रामचल राजभर, संग्राम सिंह) इस जवाब से संतुष्ट नहीं थे और जोर-जोर से शोर मचाने लगे.
सतीश महाना का गुस्सा और केतकी सिंह को डांट
जब विपक्ष हंगामा कर रहा था, उसी दौरान सत्तापक्ष (बीजेपी) की तरफ से बलिया की बांसडीह सीट से विधायक केतकी सिंह भी कुछ बोलने लगीं. सतीश महाना ने उन्हें नाम लेकर डांटा और कहा, 'बैठ जाइए, क्या आप हाउस चलाएंगी? हाउस चलाना आपका काम नहीं है, मेरा काम है.' हंगामा न रुकते देख सतीश महाना ने गुस्से में अपना हेडफोन मेज पर फेंक दिया और सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया.
आपको बता दें कि रागिनी सोनकर अपने प्रखर और तेज-तर्रार भाषणों के लिए जानी जाती हैं. केतकी सिंह भी अपने बेबाक अंदाज और कभी-कभी विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहती हैं. यह मामला सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है कि कैसे एक स्पीकर ने सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों को कड़े अंदाज में अनुशासन का पाठ पढ़ाया.
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