कोलकाता में अखिलेश यादव ने की ममता बनर्जी से मुलाकात, चुनाव नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा- 'दबाव में कराया गया इलेक्शन'

Akhilesh Yadav Mamata Banerjee meeting: पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी की हार के बाद अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी से मुलाकात की. उन्होंने चुनाव में धांधली और बीजेपी द्वारा दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए.

यूपी तक

• 06:15 PM • 07 May 2026

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Akhilesh Yadav Mamata Banerjee meeting: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव कोलकाता पहुंचे. यहां उन्होंने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से मुलाकात कर न केवल उन्हें सांत्वना दी, बल्कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए.

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हार के बाद ममता को अखिलेश का साथ

नतीजों के बाद ममता बनर्जी के आवास पर हुई इस मुलाकात में अभिषेक बनर्जी भी मौजूद रहे. अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी का ढांढस बंधाते हुए कहा कि यह हार अंतिम नहीं है. उन्होंने ममता बनर्जी के जुझारूपन की तारीफ की और संकेत दिया कि आगामी राजनीतिक लड़ाई के लिए विपक्षी एकजुटता जरूरी है.

निष्पक्षता पर सवाल और बीजेपी पर तीखा हमला

अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान चुनाव नतीजों को लेकर अपनी गहरी चिंता जताई और इसे 'लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह' करार दिया. अखिलेश ने आरोप लगाया कि चुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष नहीं थे और बीजेपी ने सत्ता और संसाधनों का दबाव बनाकर नतीजों को प्रभावित किया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी की 'सामंती सोच' महिलाओं की राजनीतिक भूमिका को स्वीकार नहीं कर पा रही है, जिसके चलते ममता बनर्जी को निशाना बनाया गया. अखिलेश ने उत्तर प्रदेश के उपचुनावों का जिक्र करते हुए दावा किया कि वहां भी वोटरों को डराया-धमकाया गया था और वही पैटर्न बंगाल में भी दोहराया गया है.

पारदर्शिता और भविष्य की रणनीति

मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच न केवल हार के कारणों पर चर्चा हुई, बल्कि आगामी राष्ट्रीय राजनीति और विपक्षी गठबंधन के भविष्य को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया. अखिलेश यादव ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह से लोकतांत्रिक संस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है, उससे लोकतंत्र कमजोर हो रहा है.

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अखिलेश और ममता की यह जुगलबंदी आने वाले समय में केंद्र की सत्ता के खिलाफ एक नए और मजबूत मोर्चे की नींव रख सकती है. यह मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि विपक्षी दल अब एकजुट होकर चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रियाओं की शुचिता पर बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं.