पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल द्वारा राजनीति में कदम रखने के ऐलान के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर का बड़ा बयान सामने आया है. दिव्या मित्तल के स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए ओमप्रकाश राजभर ने तीखा प्रहार किया है.
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राजभर ने दिव्या मित्तल के इस फैसले पर तंज कसते हुए कहा, "आईएएस बनना आसान है, लेकिन विधायक बनना नहीं. खूब पैसा होगा, इसलिए वह चुनाव लड़ रही हैं."
क्या है दिव्या मित्तल का राजनीतिक प्लान?
13 साल के प्रशासनिक करियर के बाद 30 अगस्त को आईएएस पद से इस्तीफा देने वाली दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी कर राजनीति में आने का स्वतंत्र रूप से ऐलान किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत उत्तर प्रदेश से करेंगी और उन लोगों की आवाज बनेंगी जिनकी फरियाद सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाती है.
बिना किसी पार्टी में शामिल हुए बनाएंगी नया मंच
दिव्या मित्तल ने घोषणा की कि वह किसी भी मौजूदा राजनीतिक दल के बैनर तले चुनाव नहीं लड़ेंगी. इसके बजाय, वह उन नागरिकों के साथ मिलकर एक नया मंच तैयार करेंगी जो उनका समर्थन करते हैं. उन्होंने कहा कि वह धनबल, बाहुबल या जाति-धर्म के समीकरणों से नहीं डरेंगी और लगातार सवाल पूछती रहेंगी.
उत्तर प्रदेश को बताया अपनी 'कर्मभूमि'
यूपी से शुरुआत करने के फैसले पर उन्होंने कहा, "मैं यहां एक अधिकारी के रूप में आई थी, लेकिन यहां के लोगों ने मुझे अपनी बेटी बना लिया. उत्तर प्रदेश मेरी कर्मभूमि है और इस मिट्टी ने मुझे मेरा उद्देश्य सिखाया है."
प्रशासनिक अनुभवों का दिया हवाला
आईआईटी दिल्ली, आईआईएम बैंगलोर से शिक्षित और वॉल स्ट्रीट की पूर्व ट्रेडर रहीं दिव्या मित्तल ने अपने फैसले के पीछे प्रशासनिक सेवा के दौरान मिले अनुभवों का जिक्र किया:
शिक्षा की स्थिति: उन्होंने एक पहाड़ी गांव का जिक्र किया जहां पानी की समस्या के बावजूद एक महिला ने बच्चों के लिए कक्षा 5 से आगे के स्कूल की मांग की. स्कूल स्वीकृत तो हुआ, लेकिन 3 साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो सका.
भ्रष्टाचार और लालफीताशाही: राजस्व विभाग में विशेष सचिव रहने के दौरान का एक मामला साझा करते हुए उन्होंने बताया कि एक भूमिहीन व्यक्ति को जमीन का पट्टा मिलने के बावजूद 'ऊपर के आदेश' का हवाला देकर कब्जा नहीं दिया गया.
उन्होंने कहा कि वह खराब बुनियादी ढांचे, परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं और एआई (AI) के दौर में युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर सवाल उठाना चाहती हैं. उनका मकसद सिर्फ नेता बदलना नहीं, बल्कि राजनीति की सोच और नीयत को बदलना है.
गौरतलब है कि दिव्या मित्तल देवरिया, मिर्जापुर और संत कबीर नगर में जिलाधिकारी (DM) रह चुकी हैं. मिर्जापुर में उनके कार्यकाल के दौरान आजादी के 75 साल बाद दूरस्थ पहाड़ी गांव 'लहुरियादह' में पहली बार नल से जल पहुंचा था, जिसकी काफी चर्चा हुई थी.
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