UP Viral News: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिले के डुमरियागंज में आयोजित एक सार्वजनिक भंडारे के दौरान प्रसाद (पूड़ी) देने से पहले एक मुस्लिम बुजुर्ग से 'जय श्री राम' का नारा लगवाया गया. इस पूरी घटना का वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट यूजर्स के बीच नई बहस छिड़ गई है.
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पत्तल में सब्जी लेकर पूड़ी मांगने पहुंचा था शख्स, रख दी गई शर्त
यह पूरा मामला सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज ब्लॉक के सामने का है, जहां मंगलवार (16 जून) की दोपहर करीब 3 बजे एक भंडारे का आयोजन किया गया था. इस धार्मिक आयोजन में स्थानीय बीजेपी नेता लवकुश ओझा अपने कार्यकर्ताओं के साथ मौजूद थे और आने वाले श्रद्धालुओं को खुद अपने हाथों से प्रसाद बांट रहे थे. इसी दौरान सिर पर जालीदार टोपी लगाए एक स्थानीय मुस्लिम बुजुर्ग वहां पहुंचे. उन्होंने अपनी पत्तल में सब्जी तो ले ली थी, लेकिन जैसे ही वह पूड़ियां मांगने के लिए आगे बढ़े, काउंटर पर बैठे बीजेपी नेता ने मुस्कुराते हुए उनके सामने एक शर्त रख दी.
धीमी आवाज में बोला 'जय श्री राम' तो मिलीं 2 पूड़ियां
जालीदार टोपी पहने बुजुर्ग को देखकर बीजेपी नेता लवकुश ओझा ने कहा कि पहले 'जय श्री राम' और 'जय श्री कृष्णा' बोलो, तभी प्रसाद मिलेगा. इस पर वहां मौजूद लोग भी मुस्कुराने लगे. इसके बाद उस मुस्लिम बुजुर्ग ने बेहद शांत और धीमी आवाज में 'जय श्री राम' का नारा लगा दिया. बुजुर्ग के नारा लगाते ही नेता जी खुश हो गए और उन्होंने तुरंत उनकी पत्तल में 2 पूड़ियां परोस दीं. पूड़ियां मिलने के बाद बुजुर्ग भी हाथ उठाकर आशीर्वाद देते हुए मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गए.
कौन हैं वीडियो में दिख रहे बीजेपी नेता लवकुश ओझा?
मुस्लिम बुजुर्ग से नारा लगवाकर प्रसाद देने वाले बीजेपी नेता लवकुश ओझा इलाके के एक रसूखदार राजनीतिक चेहरे हैं. उनकी पत्नी भनवापुर ब्लॉक की ब्लॉक प्रमुख हैं और लवकुश ओझा अपनी पत्नी के प्रतिनिधि के रूप में सारा कामकाज संभालते हैं. इसके साथ ही वह डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र के पूर्व हिंदूवादी विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह के बेहद करीबी सहयोगी भी माने जाते हैं.
आपसी सद्भाव या राजनीतिक हथकंडा? सोशल मीडिया पर बंटी जनता
इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है. वीडियो को लेकर इंटरनेट यूजर्स दो धड़ों में बंट गए हैं और तरह-तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं.
एक पक्ष का कहना है कि किसी भूखे व्यक्ति को भोजन या प्रसाद देने के लिए किसी भी तरह की धार्मिक शर्त नहीं रखी जानी चाहिए, यह तरीका गलत है. वहीं दूसरे पक्ष का मानना है कि वीडियो में कोई जबरदस्ती या विवाद नहीं दिख रहा है; दोनों ही पक्ष मुस्कुरा रहे थे और इसे दोनों समुदायों के बीच आपसी सौहार्द और हल्के-फुल्के माहौल के रूप में देखा जाना चाहिए.
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