भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: यूपी के निर्यात को मिलेगी नई उड़ान! सीएम योगी ने कही ये बात

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह फ्रेमवर्क भारतीय निर्यातकों और एमएसएमई (MSME) के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार करेगा.

CM Yogi

यूपी तक

08 Feb 2026 (अपडेटेड: 08 Feb 2026, 11:48 AM)

follow google news

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हुई है. हाल ही में जारी 'टैरिफ ज्वाइंट स्टेटमेंट' पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे भारतीय अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के लिए एक क्रांतिकारी कदम बताया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत अमेरिका के साथ एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक फ्रेमवर्क तक पहुंचने में सफल रहा है.

यह भी पढ़ें...

मुख्यमंत्री ने इस समझौते को भारतीय निर्यातकों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार करने वाला बताया. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समझौता न केवल 'मेक इन इंडिया' अभियान को नई ऊर्जा प्रदान करेगा, बल्कि महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर भी सृजित करेगा. मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण प्रगति के लिए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका धन्यवाद भी ज्ञापित किया.

उत्तर प्रदेश की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा बूस्ट

भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत संकेत दिया है. ज्वाइंट स्टेटमेंट के अनुसार, भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ (आयात शुल्क) को औसतन 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है. इसके अलावा, कई चुनिंदा श्रेणियों में इसे शून्य किए जाने का प्रावधान है.

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के श्रम-प्रधान उद्योगों, एमएसएमई और क्लस्टर आधारित मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने की रणनीति पर सक्रियता से काम कर रही है. स्टेटमेंट में 30 अरब डॉलर से अधिक के भारतीय निर्यात को 18 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ के दायरे में लाने की बात कही गई है. इसका सीधा लाभ उत्तर प्रदेश के टेक्सटाइल, लेदर, कृषि और औद्योगिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को मिलेगा, जहां राज्य की राष्ट्रीय भागीदारी प्रमुख है.

टेक्सटाइल और भदोही के कार्पेट सेक्टर को मिलेगी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त

टैरिफ ज्वाइंट स्टेटमेंट में टेक्सटाइल और अपैरल उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रस्ताव है. साथ ही, रेशम आधारित उत्पादों को शून्य शुल्क के दायरे में लाया गया है.

भदोही-मिर्जापुर कार्पेट सेक्टर: वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध हस्तनिर्मित कालीनों के लिए जाना जाने वाला यह क्षेत्र लंबे समय से ऊंचे आयात शुल्क के कारण अमेरिकी बाजार में पिछड़ रहा था. अब लागत संरचना में सुधार आने से निर्यात ऑर्डर और दीर्घकालिक अनुबंधों को बढ़ावा मिलेगा.

वाराणसी का सिल्क उद्योग: वाराणसी के रेशम और हैंडलूम सेक्टर को शून्य शुल्क का लाभ मिलने से अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच हासिल होगी.

रेडीमेड गारमेंट: पूर्वी उत्तर प्रदेश के पावरलूम और रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर्स को अब चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों के मुकाबले लागत के स्तर पर तुलनात्मक बढ़त मिल सकेगी.

कानपुर और आगरा के लेदर क्लस्टर के लिए नए अवसर

कानपुर और आगरा जैसे पारंपरिक लेदर क्लस्टर्स के लिए यह समझौता संजीवनी की तरह है. लेदर और फुटवियर उत्पादों पर अमेरिकी आयात शुल्क में भारी कटौती (50% से 18% तक) का प्रस्ताव है.

MSME की सीधी भागीदारी: अब तक ऊंचे शुल्क के कारण कई छोटी इकाइयां बिचौलियों के माध्यम से काम करती थीं. शुल्क घटने से ये इकाइयां सीधे निर्यात कर सकेंगी, जिससे मूल्यवर्धन का बड़ा हिस्सा स्थानीय स्तर पर ही बना रहेगा.

प्रतिस्पर्धी मूल्य: कानपुर का फिनिश्ड लेदर और आगरा का फुटवियर उद्योग अब अमेरिकी खरीदारों के साथ अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर सौदे कर सकेगा.

होम डेकोर और हस्तशिल्प, पश्चिमी यूपी की चमकेगी किस्मत

पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर क्षेत्र, जिसमें मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बुलंदशहर और गौतमबुद्ध नगर शामिल हैं, होम डेकोर उत्पादों के बड़े केंद्र हैं. लकड़ी के फर्नीचर, कुशन, गैर-इलेक्ट्रिकल लाइटिंग और सजावटी वस्तुओं पर टैरिफ 50% से घटकर 18% होने से इन उत्पादों की लागत कम होगी. यह श्रम-प्रधान उद्योग है, इसलिए निर्यात बढ़ने का सीधा सकारात्मक असर कारीगरों, सिलाई और फिनिशिंग से जुड़े कामगारों के रोजगार पर पड़ेगा.

कृषि और प्रोसेस्ड फूड, किसानों की आय बढ़ाने का नया आधार

उत्तर प्रदेश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए इस समझौते में कई संरचनात्मक अवसर हैं. ताजे फल (विशेषकर आम), सब्जियां, मसाले और रेडी-टू-ईट प्रोसेस्ड फूड पर शून्य शुल्क का प्रस्ताव है.

वैल्यू एडेड एक्सपोर्ट: राज्य में स्थापित मेगा फूड पार्क और किसान उत्पादक संगठन (FPO) अब कच्चे उत्पादों के बजाय प्रोसेस्ड फूड का निर्यात कर सकेंगे.

वैश्विक पहुंच: आलू, टमाटर और मटर जैसे उत्पादों की अमेरिकी बाजार में पहुंच बढ़ेगी, जिससे किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर दाम मिल सकेगा.

औद्योगिक विनिर्माण और फार्मा सेक्टर का विकास

नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और बुंदेलखंड क्षेत्र में फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स तेजी से विकसित हो रहे हैं.

दवा उद्योग: फार्मास्यूटिकल्स, जेनेरिक दवाओं और एपीआई (API) पर शून्य या न्यूनतम शुल्क से उत्तर प्रदेश की फार्मा इकाइयों को अमेरिकी बाजार में स्थिरता मिलेगी.

मशीनरी और ऑटो कंपोनेंट्स: इन क्षेत्रों में टैरिफ राहत मिलने से यूपी की इकाइयों को चीन के मुकाबले एक मजबूत वैकल्पिक सप्लायर के रूप में स्थापित होने में मदद मिलेगी.

आईटी और डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूती

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में आईटी और डेटा सेंटर इकोसिस्टम को इस समझौते से बड़ी राहत मिलेगी. सेमीकंडक्टर इनपुट्स और डेटा सेंटर हार्डवेयर के आयात व तकनीकी सहयोग को लेकर जो प्रतिबद्धता जताई गई है, उससे राज्य में चल रही बड़ी डेटा सेंटर परियोजनाओं की लागत कम होगी और निवेश में तेजी आएगी.

सुरक्षित रहेंगे किसानों के हित

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि यह समझौता विकास के साथ-साथ संरक्षण का भी संतुलन है. स्टेटमेंट में यह दर्ज है कि कृषि, डेयरी, अनाज, मिलेट्स, पोल्ट्री और जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फूड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भारतीय किसानों के हितों की रक्षा सर्वोपरि रखी गई है. बाजार खोलने की प्रक्रिया को चरणबद्ध और संतुलित रखा जाएगा ताकि स्थानीय पशुपालकों और छोटे उत्पादकों पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े.

यह प्रस्तावित समझौता उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है, जो राज्य के पारंपरिक शिल्प से लेकर हाई-टेक विनिर्माण तक को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाएगा.

ये भी पढ़ें: किसान क्रेडिट कार्ड KCC से सिर्फ 5 मिनट में मिल रहा लोन... यूपी में कृषि में अब AI पर बढ़ता दिखेगा जोर