उत्तर प्रदेश से बिहार, दिल्ली, मुंबई और उत्तराखंड जाने वाले रेल यात्रियों के लिए नए साल में टिकट का खर्च कुछ कम हो सकता है. भारतीय रेलवे ने कई ट्रेनों का सुपरफास्ट का दर्जा खत्म करने का फैसला किया है. इनमें यूपी से चलने वाली सप्तक्रांति, श्रमजीवी, तुलसी और महानगरी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें भी शामिल हैं.
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सुपरफास्ट का दर्जा खत्म होने का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ेगा. इन ट्रेनों में टिकट बुक कराते समय अब सुपरफास्ट का अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा. रेलवे ने इसके लिए ट्रेनों के नंबर बदलने की तैयारी की है. नई व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू होगी. कुछ ट्रेनों के नए नंबर 1 से 7 जनवरी के बीच अलग-अलग तारीखों पर लागू किए जाएंगे.
अगर आप लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, गोरखपुर या मुजफ्फरपुर से दिल्ली और मुंबई की यात्रा करते हैं तो नए साल में टिकट बुक करते समय ट्रेन का नंबर जरूर जांच लें. ट्रेन का रूट और परिचालन पहले की तरह रहेगा, लेकिन नंबर बदल जाने से पुराने नंबर से ट्रेन खोजने में परेशानी हो सकती है.
सुपरफास्ट का दर्जा हटने से कितने रुपये बचेंगे?
रेलवे की सुपरफास्ट श्रेणी में सफर करने पर यात्रियों से सामान्य किराये के अलावा सुपरफास्ट अधिभार भी लिया जाता है. ट्रेन का ये दर्जा खत्म होने के बाद यात्रियों को अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी सुपरफास्ट ट्रेनों में अलग-अलग श्रेणियों के लिए ये शुल्क लगता है-
- स्लीपर क्लास: 30 रुपये
- एसी चेयरकार, थर्ड एसी, थर्ड एसी इकोनॉमी और सेकंड एसी: 45 रुपये
- फर्स्ट एसी और एग्जीक्यूटिव क्लास: 25 रुपये
रेलवे ने सुपरफास्ट का दर्जा क्यों हटाया?
किसी ट्रेन को सुपरफास्ट श्रेणी में रखने के लिए रेलवे बोर्ड का एक तय मानक है. ट्रेन की पूरे रूट पर औसत रफ्तार कम से कम 55 किलोमीटर प्रति घंटा होनी चाहिए. शर्त अप और डाउन दोनों दिशाओं में पूरी होनी जरूरी है.
रेलवे समय-समय पर ट्रेनों की रफ्तार और समय पर पहुंचने की स्थिति की समीक्षा करता है. कई बार रास्ते में स्टॉपेज बढ़ने, रेल ट्रैक पर ट्रैफिक ज्यादा होने या सिंगल लाइन होने की वजह से ट्रेन की औसत रफ्तार कम हो जाती है. तय मानक पूरा नहीं होने पर रेलवे उसका सुपरफास्ट दर्जा वापस ले सकता है.
हालांकि, सुपरफास्ट का दर्जा हटने का मतलब ट्रेन बंद होना या उसका रूट बदलना नहीं है. ट्रेन पहले की तरह चलती रहेगी. बदलाव मुख्य रूप से उसकी श्रेणी, नंबर और किराये में होगा.
यूपी से जुड़ी कौन-कौन सी ट्रेनों के नंबर बदलेंगे?
यूपी के यात्रियों के लिए सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली ट्रेनें मुंबई और दिल्ली से आने-जाने वाली हैं. पूर्व मध्य रेलवे और मध्य रेलवे की ओर से जारी बदलावों में यूपी से जुड़ी कई ट्रेनें शामिल हैं.
1. पूर्व मध्य रेलवे की ट्रेनें
पूर्व मध्य रेलवे की अधिसूचना के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से 20 ट्रेनों के नंबर बदले जाएंगे. इनमें उत्तर प्रदेश और दिल्ली से जुड़ी ये ट्रेनें प्रमुख हैं:
- सप्तक्रांति एक्सप्रेस: मुजफ्फरपुर से आनंद विहार जाने वाली ट्रेन का नंबर 12557 से बदलकर 15577 होगा. वापसी में 12558 की जगह 15578 नंबर होगा.
- दरभंगा-जालंधर एक्सप्रेस: दरभंगा से जालंधर जाने वाली ट्रेन 22551 की जगह 15541 नंबर से चलेगी. वापसी में 22552 की जगह 15542 नंबर होगा.
- पटना-चंडीगढ़ एक्सप्रेस: इसका नंबर 22355 से बदलकर 13255 होगा. वापसी में 22356 की जगह 13256 नंबर रहेगा.
- इस्लामपुर-नई दिल्ली एक्सप्रेस: इस ट्रेन का नंबर 20801 से बदलकर 18633 होगा. वापसी में 20802 की जगह 18634 नंबर होगा.
- राजगीर-नई दिल्ली एक्सप्रेस: इसका नंबर 12391 से बदलकर 13291 होगा. वापसी में 12392 की जगह 13292 नंबर रहेगा.
2. मुंबई से यूपी आने वाली ट्रेनें
मध्य रेलवे ने भी 9 जोड़ी ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा खत्म करने का फैसला किया है. इनमें बनारस और अयोध्या आने वाली ट्रेनें भी शामिल हैं.
टिकट बुक करते समय इन बातों का रखें ध्यान
1. पुराने नंबर से टिकट न खोजें: 1 जनवरी 2027 से संबंधित ट्रेनों के नए नंबर से टिकट और सीट की उपलब्धता जांचें.
2. ट्रेन का रूट नहीं बदलेगा: नंबर बदलने का मतलब यह नहीं है कि ट्रेन का रास्ता या उसका परिचालन बंद हो जाएगा.
3. यात्रा का समय अलग से जांचें: उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बदलाव ट्रेन की श्रेणी और नंबर से जुड़ा है. यात्रियों को अपनी यात्रा की तारीख का टाइम टेबल जरूर देखना चाहिए.
4. पहले से बुक टिकट का ध्यान रखें: अगर आपने नए साल की यात्रा के लिए पहले ही टिकट ले लिया है तो रेलवे की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार पुराने और नए नंबर का मिलान कर लें.
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