मंत्री टेनी की बर्खास्तगी, बेटे की गिरफ्तारी तक जारी रहेगा SKM का संघर्ष: योगेंद्र यादव

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लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर को हुई हिंसा के मामले में किसान नेता योगेंद्र यादव ने संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की तरफ से एक स्पष्टीकरण सामने रखा है. उन्होंने बताया है कि प्रशासन के साथ 4 अक्टूबर को हुआ समझौता सिर्फ मृत किसानों के अंतिम संस्कार का रास्ता साफ करने के लिए था.

योगेंद्र यादव ने 5 अक्टूबर को ट्वीट कर कहा, ”एसकेएम स्पष्ट करता है, कल प्रशासन के साथ समझौता केवल (मृतकों के) अंतिम संस्कार का रास्ता साफ करने के लिए था. एसकेएम की प्रमुख मांगें बरकरार हैं: आशीष मिश्रा और उनके साथियों की तत्काल गिरफ्तारी; गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी और हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर की बर्खास्तगी. हमारा संघर्ष जारी रहेगा.”

बता दें कि 4 अक्टूबर को किसानों और प्रशासन के बीच कुछ बातों पर सहमति बनने के बाद किसान नेता राकेश टिकैत और यूपी के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी.

इस दौरान प्रशांत कुमार ने बताया था कि लखीमपुर खीरी में मारे गए 4 किसानों के परिवारों को सरकार 45-45 लाख रुपये और एक-एक सरकारी नौकरी देगी. उन्होंने बताया था कि घायलों को 10-10 लाख रुपये दिए जाएंगे, ”किसानों की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी. हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज मामले की जांच करेंगे.”

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क्या है लखीमपुर खीरी हिंसा मामला?

यूपी के लखीमपुर खीरी के तिकुनिया इलाके में 3 अक्टूबर को भारी हिंसा हुई थी. यूपी पुलिस के मुताबिक, इस हिंसा में कुल 8 लोगों की मौत हुई है. हिंसा की यह घटना तिकुनिया से 4 किलोमीटर दूर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के पैतृक गांव बनवीरपुर में आयोजित कुश्ती कार्यक्रम में यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के पहुंचने से पहले हुई.

संयुक्त किसान मोर्चा के मुताबिक, प्रदर्शनकारी किसान मौर्य के कार्यक्रम का शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे. मोर्चा ने आरोप लगाया है कि टेनी के बेटे आशीष मिश्रा के गाड़ियों के काफिले ने किसानों को रौंदा. बताया जा रहा है कि यह काफिला डिप्टी सीएम को रिसीव करने के लिए आ रहा था.

हालांकि, इस मामले में आशीष मिश्रा ने दावा किया है कि घटना के वक्त वह काफिले की गाड़ियों में मौजूद नहीं थे. इसके साथ ही आशीष ने दावा किया है, ”हमारे कार्यकर्ता डिप्टी सीएम को रिसीव करने जा रहे थे, जैसे ही वो लोग तिकुनिया से निकले, तो अपने आप को किसान कहने वालों ने आक्रमण कर दिया.”

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