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मिर्जापुर की इस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेगी पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल? राह नहीं होगी आसान, बीजेपी देगी कड़ी टक्कर

Divya Mittal Politics: पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने जब से प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर राजनीति में आने का ऐलान किया है, तभी से यह कयास लगाया जा रहा है कि वह कौन सी सीट होगी जहां से दिव्या चुनाव लड़ेंगी. हालांकि उनके ऐलान से पहले यह कयास लगाया जा रहा है कि वह मिर्जापुर सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं.

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Divya Mittal Politics: पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने जब से प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर राजनीति में आने का ऐलान किया है, तभी से यह कयास लगाया जा रहा है कि वह कौन सी सीट होगी जहां से दिव्य चुनाव लड़ेंगी. हाल ही में उन्होंने ऐलान किया था कि वो अक्टूबर महीने में नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान अपने अगले राजनीतिक कदम की जानकारी देंगी. हालांकि उनके ऐलान से पहले यह कयास लगाया जा रहा है कि वह मिर्जापुर सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं.

जानकारी के लिए बता दें प्रशासनिक सेवा के दौरान दिव्या मित्तल की मिर्जापुर से सांसद और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के साथ काम को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद उनका ट्रांसफर देवरिया कर दिया गया था. अब उनका मिर्जापुर से विधानसभा चुनाव लड़ना बहुत बड़ा फैसला साबित होगा. आइए जानते हैं मिर्जापुर सदर विधानसभा सीट के समीकरण जो दिव्या मित्तल के बिल्कुल फिट बैठते हैं.

स्थानीय पत्रकार ने बताया दिव्या मित्तल के लिए पर्फेक्ट सीट

मिर्जापुर के स्थानीय पत्रकार का मानना है कि दिव्या मित्तल मिर्जापुर की जिस भी सीट से चुनाव लड़ती है. वहां से वो सपा, बीजेपी या जिस भी पार्टी का उम्मीदवार होगा उसे कड़ी टक्कर देती हुईं नजर आएंगी. पत्रकारों के मुताबिक अगर वह मिर्जापुर सदर सीट से चुनाव लड़ती हैं, तो यह उनके लिए सोने पर सुहागा होगा. पत्रकारों का मानना है की यदि दिव्या मिर्जापुर सदर सीट से मैदान में आती हैं, तो इसका सीधा नुकसान भारतीय जनता पार्टी को हो सकता है.

मिर्जापुर सदर सीट के जातीय समीकरण

दिव्या मित्तल के सदर सीट से चुनाव लड़ने की सबसे बड़ी वजह इस सीट का वैश्य वोट बैंक है. दिव्या मित्तल खुद वैश्य समाज से आती हैं और इस सीट पर वैश्य मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है. जो संख्या में करीब 65000 है. इसके अलावा यहां ब्राह्मण 45000, दलित 40000, मुस्लिम 35000, क्षत्रिय 30000 और यादव 25000 हैं. माना जा रहा है कि यदि वह विपक्षी पार्टी मुख्य रूप से सपा के टिकट से चुनाव लड़ती हैं, तो वैश्य, यादव, मुस्लिम और दलित वोटों का गठजोड़ उनके लिए जीत का समीकरण बना सकता है.

सदर सीट पर पहले कौन जीता है?

मिर्जापुर सदर विधानसभा सीट का पिछले चुनावी इतिहास को देखें तो इस सीट पर बीजेपी का कब्जा रहा है. साल 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में यहां से बीजेपी के उम्मीदवार रत्नाकर मिश्रा चुनाव जीते हैं. इससे पहले 2002, 2007 और 2012 में लगातार तीन बार समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार कैलाश चौरसिया ने इस सीट से जीत दर्ज की थी.

क्या छानबे सीट से लड़ेंगी दिव्या?

राजनीति की समझ रखने वाले कुछ लोग यह भी बोल रहे हैं कि दिव्या छानबे से सीट से चुनाव लड़ सकती हैं. क्योंकि दिव्या मित्तल का विवाद छानबे विधानसभा के एक गांव में ही हुआ था. लेकिन आपको बता दें कि छानबे एक सुरक्षित विधानसभा सीट है, इसलिए सामान्य वर्ग से आने वाली दिव्या मित्तल का वहां से चुनाव लड़ना संभव नहीं है. फिलहाल छानबे सीट से अपना दल की रिंकी कोल विधायक हैं.

पार्टी को लेकर दिव्या का बयान

फिलहाल दिव्या मित्तल ने अभी अपने राजनीतिक पत्ते नहीं खोले हैं. उन्होंने स्पष्ट कहा है कि औपचारिक ऐलान से पहले अफवाहों पर ध्यान न दें. सही समय आने पर वह खुद बताएंगी कि किस पार्टी से और कौन-सी विधानसभा सीट से वह चुनाव लड़ेंगी. उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि वह बिना किसी पार्टी के भी चुनाव मैदान में उतर सकती हैं.

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