लेटेस्ट न्यूज़

सीएम योगी की तारीफ कर चर्चा में आईं सपा विधायक महाराजी देवी कौन हैं?

अमेठी की सपा विधायक महाराजी देवी ने सीएम योगी की जमकर तारीफ की, जिसके बाद 2027 चुनाव से पहले सियासी चर्चाएं तेज हो गईं.

ADVERTISEMENT

Maharaji Devi praise on CM Yogi
Maharaji Devi praise on CM Yogi
social share
Google CTA

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले कयासों और नए सियासी समीकरणों का दौर शुरू हो चुका है. इसी कड़ी में अमेठी से समाजवादी पार्टी की विधायक महाराजी देवी एक बार फिर सुर्खियों में आ गई हैं. बीते दिनों अमेठी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक सरकारी कार्यक्रम में शिरकत करने और कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में सीएम योगी की जमकर तारीफ करने के बाद उत्तर प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है. सपा विधायक की यह तारीफ केवल एक औपचारिक धन्यवाद है या किसी बड़े सियासी उलटफेर का संकेत, इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.

योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम में मौजूदगी और तारीफ

अमेठी में कोटेदारों (राशन वितरणकर्ताओं) को लेकर आयोजित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम में सपा विधायक महाराजी देवी पहुंची थीं. कार्यक्रम के बाद जब मीडिया ने उनसे सवाल किया, तो उन्होंने बेहद सकारात्मक लहजे में मुख्यमंत्री के कामकाज को सराहा. उन्होंने कहा 'बहुत अच्छा लगा. मुख्यमंत्री जी को बहुत-बहुत बधाई. कोटेदारों का मानदेय बढ़ाया गया है, किसानों को फायदा मिलेगा, यह सब बहुत अच्छा काम है. मुख्यमंत्री जी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं.'

जब उनसे पूछा गया कि क्या पहले कोई समस्या थी, तो उन्होंने सहजता से जवाब दिया कि सरकारी कार्यक्रम हैं और जनहित के काम होते रहते हैं. सपा की विधायक होने के बावजूद सीएम योगी के मंच और फैसलों की खुलकर तारीफ करना अब सपा खेमे में असहजता पैदा कर रहा है.

राज्यसभा चुनाव में 'क्रॉस वोटिंग' और शक के दायरे में भूमिका

महाराजी देवी का नाम पहली बार विवादों में तब आया था जब उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के भीतर बड़ी बगावत हुई थी. उस समय सपा के मुख्य सचेतक मनोज पांडे समेत कई विधायकों (राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह, पूजा पाल आदि) ने बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी.

उसी चुनाव में महाराजी देवी ने भी सपा प्रत्याशी को वोट नहीं दिया था और बीमारी का हवाला देकर अनुपस्थित रही थीं. तभी से वह समाजवादी पार्टी के भीतर शक के घेरे में थीं और उन्हें बागी गुट के करीब माना जाने लगा था.

कौन हैं महाराजी देवी

महाराजी देवी की सियासी पहचान और कहानी उनके पति और पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रजापति से जुड़ी हुई है. अमेठी के पसराना गांव में एक गरीब कुम्हार परिवार में जन्मे गायत्री प्रजापति कभी बीपीएल (BPL) कार्डधारक हुआ करते थे. वह पेंटिंग-पुताई और छोटे-मोटे नाटकों में काम करते-करते ठेकेदारी के क्षेत्र में आए. 1990 के दशक में वह समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के संपर्क में आए. 1993 और 1996 के चुनावों में हारने के बाद भी मुलायम सिंह से उनकी नजदीकी बनी रही.

2012 में अखिलेश यादव सरकार के दौरान वह चुनाव जीतकर खनन मंत्री बने. हालांकि इसके बाद उन पर अवैध खनन, भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के गंभीर आरोप लगे. 2017 में उन पर गंभीर आपराधिक मामला दर्ज हुआ जिसके बाद से वह जेल में हैं.

2022 का सियासी उलटफेर और मौजूदा राजनीतिक मायने

पति के जेल जाने के बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने महाराजी देवी को मैदान में उतारा. उन्होंने अमेठी के पूर्व राजा और बीजेपी के दिग्गज नेता संजय सिंह को हराकर बड़ी जीत दर्ज की थी. हालांकि जीत के बाद से ही महाराजी देवी लगातार अपने पति की राहत और कानूनी मामलों को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलती रही हैं और गुहार लगाती रही हैं.

अमेठी और आसपास के क्षेत्रों में गौरीगंज से सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह पहले ही बीजेपी के पाले में खड़े नजर आ रहे हैं. ऐसे में महाराजी देवी का रुख सपा के लिए चिंता का सबब बन सकता है. अब देखना यह होगा कि 2027 के चुनाव से पहले यह तारीफ केवल एक औपचारिक शिष्टाचार बनी रहती है या फिर महाराजी देवी किसी नए राजनीतिक सफर की शुरुआत करती हैं.