यूपी MLC चुनाव में बीजेपी के समर्थन में उतरे राजा भैया तो सपा के सपोर्ट में आ गए स्वामी प्रसाद मौर्य
यूपी एमएलसी चुनाव की 11 सीटों पर सियासी हलचल के बीच राजा भैया ने NDA और स्वामी प्रसाद मौर्य ने इंडिया ब्लॉक को समर्थन दिया. वहीं पल्लवी पटेल और अखिलेश यादव के रिश्तों में सुधार से 2027 चुनाव के नए समीकरण चर्चा में हैं.
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उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर हो रहे चुनाव सिर्फ एक औपचारिक मतदान नहीं हैं बल्कि यह आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों का बड़ा सेमीफाइनल साबित होने जा रहे हैं. इस चुनाव के बहाने उत्तर प्रदेश के छोटे दलों और उनके बड़े नेताओं ने अपनी राजनीतिक पोजीशनिंग साफ करनी शुरू कर दी है. राजा भैया (जनसत्ता दल लोकतांत्रिक), स्वामी प्रसाद मौर्य और पल्लवी पटेल जैसे नेताओं के कदमों ने यह साफ कर दिया है कि वे आने वाले समय में किस राजनीतिक खेमे के साथ खड़े नजर आएंगे.
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की मुलाकात और समर्थन का ऐलान
हाल ही में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने लखनऊ में राजा भैया से उनके आवास पर मुलाकात की थी. इस मुलाकात को भले ही तात्कालिक रूप से 11 एमएलसी सीटों के चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा हो, लेकिन इसके दूरगामी राजनीतिक मायने 2027 के चुनाव से जुड़े हैं.
राजा भैया के बेहद करीबी और एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल जी ने यह साफ कर दिया है कि राजा भैया ने इन 11 एमएलसी चुनावों में एनडीए के सभी उम्मीदवारों को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है. इसके साथ ही राजा भैया का झुकाव स्पष्ट रूप से एनडीए खेमे की तरफ दिखाई दे रहा है.
स्वामी प्रसाद मौर्य का बदला रुख
अपनी नई पार्टी बनाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य ने इन एमएलसी चुनावों में अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे 'इंडिया ब्लॉक' (सपा-कांग्रेस गठबंधन) के प्रत्याशियों का समर्थन करें. हाल ही में दिल्ली में राहुल गांधी से उनकी मुलाकात के बाद से यह माना जा रहा है कि वह औपचारिक रूप से विपक्षी खेमे (इंडिया ब्लॉक) की तरफ बढ़ रहे हैं. हालांकि वह कांग्रेस में शामिल होंगे या गठबंधन के तहत अपनी पार्टी की अलग पहचान रखेंगे यह आने वाला वक्त तय करेगा.
पल्लवी पटेल और अखिलेश यादव के सुधरते रिश्ते
पल्लवी पटेल ने हाल ही में अखिलेश यादव को अपना बड़ा भाई बताया है जिसके बाद दोनों के बीच पिछले कुछ सालों में आए राजनीतिक तनाव कम होते नजर आ रहे हैं. पल्लवी पटेल अच्छी तरह जानती हैं कि अकेले दम पर चुनाव जीतना आसान नहीं है. ऐसे में 2027 के रण से पहले उनका समाजवादी पार्टी के करीब आना और सीटों को लेकर आपसी सहमति बनाने की कोशिश करना इस बात का संकेत है कि वह एक बार फिर साइकिल के साथ चुनावी मैदान में ताल ठोक सकती हैं.
एमएलसी चुनाव: 2027 का सियासी नैरेटिव और सेमीफाइनल
इस एमएलसी चुनाव में गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर बीजेपी के बागी डॉ. संजयन त्रिपाठी का समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ना और अन्य जगहों पर राजनीतिक सरगर्मी यह बता रही है कि दलगत सीमाओं से परे जाकर खींचतान तेज हो गई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 11 सीटों के ये परिणाम तय करेंगे कि 2027 के फाइनल मुकाबले से पहले कौन सी पार्टी मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करती है. एनडीए और सपा दोनों के लिए यह चुनाव अपनी ताकत दिखाने का बड़ा जरिया बन गया है.
