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सपा छोड़कर आए नारद राय, बलिया की फेफना सीट पर क्या बीजेपी देगी टिकट?

बलिया की फेफना सीट पर 2027 चुनाव से पहले टिकट की जंग तेज हो गई है. बीजेपी में उपेंद्र तिवारी, नारद राय और चंद्रशेखर परिवार की दावेदारी है, तो सपा में संग्राम यादव और अंबिका चौधरी समेत कई दिग्गज मैदान में हैं.

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Phephna Assembly Seat
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उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की फेफना विधानसभा सीट 2027 के चुनाव से पहले सूबे की सबसे दिलचस्प और हॉट सीटों में से एक बन गई है.परिसीमन के बाद वजूद में आई इस सीट का इतिहास रहा है कि यहां से दिग्गज चुनाव लड़ते आए हैं.लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों ही दलों में टिकटार्थियों की लंबी फौज खड़ी हो गई है.

एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी अपने मौजूदा विधायक और पूर्व दिग्गजों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती से जूझ रही है. वहीं भारतीय जनता पार्टी में पूर्व मंत्रियों, बड़े कद्दावर भूमाफिया/भूमिहार नेताओं और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के परिवार की दावेदारी से टिकट की रेस बेहद रोमांचक हो गई है.

बीजेपी में टिकट के दावेदारों की लगी 'बाढ़'

बीजेपी के भीतर फेफना सीट से दावेदारी को लेकर जबरदस्त घमासान मचा हुआ है. यहां पार्टी के पास तीन बड़े और कद्दावर नाम सामने आ रहे हैं.

उपेंद्र तिवारी (पूर्व मंत्री): भूमिहार समुदाय से आने वाले उपेंद्र तिवारी 2012 (जब सपा की लहर थी) और 2017 में फेफना से विधायक चुने गए थे. वे लगातार बीजेपी में निष्ठावान रहे हैं. हालांकि 2022 का चुनाव वे बेहद कम अंतर से हार गए थे. उनका जमीनी संघर्ष और लंबा ट्रैक रिकॉर्ड उनकी दावेदारी को मजबूत बनाता है.

नारद राय (पूर्व सपा मंत्री): बलिया के बड़े कद्दावर नेताओं में शुमार नारद राय 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अखिलेश यादव पर आरोप लगाते हुए बीजेपी में शामिल हो गए थे. उन्हें खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंच से पार्टी में शामिल कराया था. भूमिहार बहुल बेल्ट में नारद राय का तगड़ा प्रभाव है और वे लगातार फेफना में जनसंपर्क कर टिकट का दावा ठोक रहे हैं.

डॉ. सुषमा शेखर (नीरज शेखर की पत्नी): पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत चंद्रशेखर के पुत्र और पूर्व सांसद नीरज शेखर का राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने और लोकसभा चुनाव हारने के बाद अब उनके परिवार की नजर फेफना विधानसभा सीट पर है. उनकी पत्नी डॉ. सुषमा शेखर क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं और ठाकुर मतदाताओं के बीच चंद्रशेखर परिवार के प्रभाव का लाभ उठाना चाहती हैं.

सिटिंग विधायक बनाम कद्दावर पुराने चेहरे

सपा के पास वर्तमान में यह सीट कब्जे में है, लेकिन अंदरूनी खींचतान यहां भी कम नहीं है.

संग्राम सिंह यादव (मौजूदा विधायक): बसपा छोड़कर सपा में आए संग्राम सिंह यादव ने 2022 में फेफना से जीत दर्ज की थी. वे हाल ही में सपा के जिलाध्यक्ष भी थे. हालांकि अब उन्हें पद से मुक्त कर केवल विधायकी पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है. सिटिंग एमएलए होने के नाते वे मजबूत दावेदार हैं.

अंबिका चौधरी (पूर्व मंत्री): मुलायम सिंह यादव के दौर के दिग्गज सपा नेता और 4 बार के विधायक अंबिका चौधरी की गिनती कद्दावर नेताओं में होती है. शिवपाल यादव की वापसी के बाद सपा के भीतर उनका और उनके बेटे (जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद चौधरी) का सियासी दबदबा फिर बढ़ा है.

अवधेश सिंह (राष्ट्रीय सचिव): अखिलेश यादव के बेहद करीबी माने जाने वाले सपा के राष्ट्रीय सचिव अवधेश सिंह भी फेफना से दावेदारी कर रहे हैं. पूर्वांचल दौरों पर वे अक्सर अखिलेश यादव के साथ नजर आते हैं.

अन्य दावेदार: पूर्व ब्लॉक प्रमुख बंसीधर यादव और वीरलाल यादव भी सपा से टिकट की रेस में शामिल हैं.

बहुजन समाज पार्टी (बसपा): इकलौती मजबूत दावेदार

बहुजन समाज पार्टी (BSP) भी फेफना में मुख्य मुकाबले में रही है. पूर्व में सुग्रीव सिंह ने यहां से कड़ा मुकाबला लड़ा था. इस बार बलिया की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष भारती सिंह (सुग्रीव सिंह की पुत्रवधू) बीएसपी से इकलौती और सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं.

2027 का मुख्य सियासी समीकरण

फेफना सीट पर भूमिहार, यादव, ठाकुर और मौर्या/पिछड़ा वर्ग के मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं.

बीजेपी किसी भूमिहार चेहरे (उपेंद्र तिवारी या नारद राय) पर दांव लगाती है तो सपा के पारंपरिक वोट बैंक और एंटी-इंकंबेंसी से मुकाबला रोचक होगा. वहीं अगर बीजेपी सुषमा शेखर के रूप में नया चेहरा लाती है या सपा अपने पुराने दिग्गज अंबिका चौधरी पर दांव खेलती है, तो फेफना का चुनावी समीकरण पूरी तरह पलट सकता है. अब गेंद सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बीजेपी आलाकमान के पाले में है कि वे अपने-अपने दलों के किस 'दावेदार' पर भरोसा जताते हैं.

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