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जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव को सुना दिया, बोले- अंदर की बातें खोल दीं तो सपा को खड़े होने की जगह नहीं मिलेगी

जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि सपा प्रमुख हल्की बातें कर रहे हैं. उन्होंने गठबंधन की अंदरूनी बातें सार्वजनिक करने पर बड़ा दावा किया और जातिगत राजनीति के बजाय विकास, रोजगार और किसानों के मुद्दों पर जोर दिया.

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File Photo: Akhilesh Yadav and Jayant Chaudhary
File Photo: Akhilesh Yadav and Jayant Chaudhary
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राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के प्रमुख जयंत चौधरी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच जारी जुबानी जंग अब और तीखी हो गई है. अखिलेश यादव द्वारा सोशल मीडिया पर एनडीए के सहयोगी दलों की सीटों को लेकर किए गए दावे और हालिया बयानों पर जयंत चौधरी ने जोरदार पलटवार किया है. एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि अखिलेश यादव हल्की बातें कर रहे हैं. अगर वे दोनों दलों के गठबंधन के दौरान की अंदरूनी बातें सार्वजनिक कर देंगे तो सपा प्रमुख को उत्तर प्रदेश में खड़े होने की जगह नहीं मिलेगी.

'सीटों से तय नहीं होता चौधरी चरण सिंह का सम्मान'

अखिलेश यादव द्वारा सोशल मीडिया पर एनडीए के सहयोगी दलों (आरएलडी, सुभासपा, निषाद पार्टी, अपना दल) की संभावित सीटों को लेकर किए गए पोस्ट पर जयंत चौधरी ने सख्त एतराज जताया. उन्होंने कहा कि जब सपा के साथ आरएलडी का गठबंधन था तब भी सारी बातें सार्वजनिक नहीं की जाती थीं. जयंत ने कहा 'यह मेरी गंभीरता है कि मैं उन बातों को दबाकर बैठा हूं. चौधरी चरण सिंह जी का सम्मान दो-चार विधानसभा सीटों से तय नहीं होता, उनका सम्मान हर व्यक्ति के दिल में है. लोकदल को भले एक भी सीट न मिले, तब भी चौधरी चरण सिंह का सम्मान हल्का नहीं होने वाला.'

चवन्नी और G for गन्ना विवाद पर ये कहा

अखिलेश यादव के 'चवन्नी को रुपया बना दिया' वाले तंज और हाल में 'G for गन्ना' बोलने पर उठे विवाद पर भी जयंत चौधरी ने खुलकर अपनी बात रखी. जयंत ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की ही सोच थी कि शिक्षण संस्थानों को जाति के नाम से मुक्त रखा जाए. इसी कारण 'जाट कॉलेज बड़ौत' का नाम बदला गया और 'गुर्जर कृषि विद्यालय' का नाम 'गोचर' किया गया ताकि शिक्षा सभी के लिए समान रहे. 

जयंत ने कहा 'मैं चौधरी चरण सिंह का वंशज हूं. जिस प्रांगण में मैं खड़ा था, उसकी मर्यादा और चौधरी साहब की विचारधारा को ध्यान में रखकर ही मैंने 'जी फॉर गन्ना' कहा था. मेरे लिए किसान और गन्ना सर्वोपरि हैं.'

जातिगत धुव्रीकरण बनाम विकास और रोजगार

जयंत चौधरी ने मीडिया और राजनीतिक विरोधियों से अपील की कि हर बात को 'जाति के चश्मे' से देखना बंद करें. उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही अपराधों और सामान्य घटनाओं में भी जाति तलाशकर समाज को बांटने की कोशिश की जाती है जिससे प्रदेश का कोई भला नहीं होने वाला.

उन्होंने कहा कि आज का युवा जातियों के जाल में नहीं उलझना चाहता. राजनीति का असली मुद्दा शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, हाईवे निर्माण और किसानों की उपज का सही मूल्य होना चाहिए. सहारनपुर-दिल्ली हाईवे का उदाहरण देते हुए जयंत ने कहा कि जो दूरी पहले 6 घंटे में तय होती थी, वह अब काफी कम समय में पूरी हो रही है, जनता इसी तरह की प्रगति और विकास चाहती है.

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