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बीजेपी के साथ गठबंधन में फंस गए हैं ओपी राजभर? अखिलेश यादव ने सुभासपा के लिए की ये बड़ी भविष्यवाड़ी

Rajbhar vs Akhilesh Yadav: अखिलेश यादव ने ओम प्रकाश राजभर को लेकर एक बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा है कि ओम प्रकाश राजभर अब किसी दूसरे दल में जाने लायक नहीं बचे हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बीजेपी ओपी राजभर को 2027 के विधानसभा चुनाव में महज तीन सीटें ही देगी.

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Rajbhar vs Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश में अगले साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. जैसे-जैसे ये साल बीत रहा है, राजनेता भी अपने चुनावी मोड में एक्टिव हो रहे हैं. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर इन दिनों काफी चर्चा में हैं. अखिलेश यादव पर रोजाना तीखा हमला करने वाले राजभर को लेकर अब खुद अखिलेश यादव ने एक बड़ा दावा किया है.

अखिलेश यादव ने कहा है कि ओम प्रकाश राजभर अब किसी दूसरे दल में जाने लायक नहीं बचे हैं. उन्होंने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा है कि बीजेपी सुभासपा को चुनाव में सिर्फ तीन सीटें ही देगी. इस बयान के बाद पूर्वांचल की सियासत गरमा गई है और अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या सच में राजभर बीजेपी के साथ गठबंधन में फंस गए हैं

अखिलेश यादव ने ली राजभर की चुटकी

अखिलेश यादव ने मजाकिया अंदाज में ओम प्रकाश राजभर पर निशाना साधते हुए कहा है कि, 'उनके सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं. बीजेपी बहुत होशियार है पार्टी है, उसने राजभर से इतने ट्वीट करवा दिए हैं कि अब वो किसी और दल में जाने लायक नहीं बचे हैं.' अखिलेश ने आगे कहा कि बीजेपी उन्हें 2027 के चुनाव में सिर्फ तीन सीटें ही देगी. इसके साथ ही अखिलेश यादव ने यह भी कहा है कि सपा ने राजभर को जितनी सीटें दी थीं, बीजेपी को उससे दोगुनी सीटें उन्हें देनी चाहिए.

राजभर का अखिलेश को पलटवार

अखिलेश यादव के इस बयान पर ओम प्रकाश राजभर ने भी करारा जवाब दिया है. उन्होंने कहा है कि, 'अखिलेश यादव एनडीए के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं क्या, जो उन्हें इतनी जानकारी है?' राजभर ने दावा किया है कि पूर्वांचल में समाजवादी पार्टी ने जितनी भी सीटें जीती थीं, उनमें से 90 प्रतिशत उनके सहयोग से ही मिली थीं. उन्होंने कहा कि उनके सपा से हटने के बाद अखिलेश यादव परेशान हैं क्योंकि उनके पास राजभर वोट बैंक को साधने वाला कोई दूसरा बड़ा चेहरा नहीं है.

सीटों के बंटवारे पर फंस रहा है पेंच

ओपी राजभर भले ही अखिलेश यादव को कुछ भी नसीहत दे रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ओम प्रकाश राजभर के लिए बीजेपी से सीटें मांगना बिल्कुल भी आसान नहीं वाला है. राजभर और बीजेपी के बीच कई सीटों पर सीधा पेंच फंस रहा है. जहूराबाद सीट पर राजभर खुद चुनाव लड़ना चाहते हैं, ठीक इसी सीट पर बीजेपी कालीचरण राजभर को मैदान में उतारना चाहती है. दूसरी फंसी हुई सीट बनारस की शिवपुर है, जहां से बीजेपी के कद्दावर मंत्री अनिल राजभर विधायक हैं. ओम प्रकाश राजभर यहां से अपने बेटे अरविंद राजभर को लड़ाना चाहते हैं. ऐसे में क्या बीजेपी अपने मंत्री का टिकट काटेगी, यह एक बड़ा सवाल बनता है.

अतरौलिया और मऊ सदर पर भी दावेदारी

तीसरी सीट अतरौलिया की है, जहां ओम प्रकाश राजभर अपने दूसरे बेटे अरुण राजभर को चुनाव लड़ाना चाहते हैं. लेकिन यहां संजय निषाद की पार्टी ने भी अपना मजबूत दावा ठोक दिया है.  मऊ सदर की वीआईपी सीट पर भी राजभर की नजर है. फिलहाल इस सीट से बाहुबली मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी सुभासपा के ही टिकट पर विधायक हैं, लेकिन अब वह राजभर के साथ नहीं हैं. इस सीट पर बीजेपी के अशोक सिंह लंबे समय से मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं.

क्या राजभर कर पाएंगे बारगेनिंग?

ओम प्रकाश राजभर की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि वह पूर्वांचल की जिन-जिन सीटों पर वह दावा कर रहे हैं, वहां बीजेपी के भी मजबूत उम्मीदवार पहले से ही तैयारी में जुट चुके हैं. अब ये देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या राजभर अपनी राजनीतिक ताकत के दम पर बीजेपी से अपने मनमुताबिक सीटें ले पाएंगे या फिर अखिलेश यादव की 'तीन सीटों' वाली भविष्यवाणी सच साबित हो जाएगी.

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