कानपुर मेट्रो के स्टेशनों में अत्याधुनिक बैगेज स्कैनर मशीनें लगी हैं, जिन्हें एक्सरे बैगेज इन्सपेक्शन सिस्टम (XBIS) कहा जाता है. ये मशीनें मेट्रो सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था को अचूक बनाती हैं. ये मशीनें प्रतिबंधित सामानों की पहचान कर उन्हें एंट्री गेट पर ही रोकने में सुरक्षाकर्मियों की मदद करती हैं. मशीन पर तैनात सुरक्षाकर्मी के सामने दो मॉनिटर होते हैं. एक स्क्रीन पर कलर्ड (रंगीन) इमेज आती है और एक स्क्रीन पर ब्लैक ऐंड व्हाइट. ब्लैक ऐंड व्हाइट इमेज से साफतौर पर आकृति का पता चलता है और रंगीन इमेज कलर कोडिंग के हिसाब से संकेत देती है. अलग-अलग सामानों के लिए एक निर्धारित कलर-कोडिंग है, जिससे उनकी पहचान की जाती है. सामान के घनत्व के हिसाब से मशीन कलर दिखाती है. आमतौर पर ऑरेंज, ब्राउन, ग्रीन और यलो कलर्स खतरे का संकेत नहीं होते, लेकिन सुरक्षाकर्मी को सामान की आकृति (शेप) पर गौर करना होता है. अगर आकृति संदिग्ध लगती है तो सामान को खोलकर चेक किया जाता है. ब्लू, ब्लैक और सिल्वर या ग्रे कलर संदिग्ध वस्तु के संकेतक होते हैं. इन रंगों का संकेत मिलने पर तुरंत सामान की जांच की जाती है. एक मशीन में 1280 सेंसर्स लगे हुए हैं. यात्रियों का सामान मशीन में न फंसे इसके लिए दो इमरजेंसी स्टॉप स्विच मशीन में हैं और एक कीबोर्ड में.