उमराव जान: तवायफ और प्रेमिका की कहानी, अवध की शान को काशी में बितानी पड़ी थी गुमनाम जिंदगी
बनारस में 26 दिंसबर की सुबह बहुत ज्यादा ठंड नहीं थी और लोग हमेशा की तरह अपने रोजमर्रा के कामों में लगे हुए थे. शहर…
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बनारस में 26 दिंसबर की सुबह बहुत ज्यादा ठंड नहीं थी और लोग हमेशा की तरह अपने रोजमर्रा के कामों में लगे हुए थे. शहर की तंग सड़कों पर तेज हॉर्न बजा कर भागते हुए लोगों को देख कर ऐसा लग रहा था, जैसे- किसी ने रेस की सीटी बजाई है और ना चाहते हुए भी उन्हें इस रेस में हिस्सा लेना पड़ा है. बनारस में लगने वाले ट्रैफिक जाम का रंग भी एकदम निराला है, क्योंकि कभी-कभी इस जाम में लोगों के साथ भगवान भोले नाथ की सवारी भी साथ चलते दिख जाती है. दौड़ती गाड़ियां, भागते लोग और तेज हॉर्न के शोरगुल से दूर आज के दिन कुछ लोग एक मकबरे को साफ करते हुए दिख जाते है. जहां एक बूढ़ा आदमी गुलाब के फूलों को कब्र पर जल्द से जल्द बिखेरने की कोशिश कर रहा है. जैसे कब्र को इन फूलों की महक का इंतजार ना जाने कब से हो.