जेल से निकल एक्टिव मोड में आए आजम, जौहर यूनिवर्सिटी को बुलडोजर से बचाने के लिए किया ये काम

संतोष शर्मा

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सपा नेता और विधायक आजम खान 27 महीने बाद जेल से निकलते ही एक्टिव मोड में आ गए हैं. उन्होंने जौहर यूनिवर्सिटी की इमारतों और चारदीवारी के कुछ हिस्से गिराए जाने की कार्रवाई की आशंका से सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है. उन्होंने अर्जी के जरिए ऐसी किसी भी कार्रवाई को रोकने की गुहार लगाई है.

वकील निजाम पाशा ने आजम की अर्जी में मेंशन करते हुए वेकेशन बेंच से जल्द सुनवाई की मांग की है. मेंशनिंग पर जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा कि याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने के लिए पहले रजिस्ट्रार के सामने ले जाएं. आजम खान की अर्जी में कहा गया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा तय की गई जमानत शर्तो के मुताबिक यूनिवर्सिटी कैम्पस की करीब 13 हेक्टेयर जमीन को जिला प्रशासन ने कब्जे में ले लिया है. इस पर आजम कोई एक्शन नहीं लेंगे.

याचिका में कहा गया है कि जमानत देते वक्त ऐसी शर्त थोपना गलत है. इसके चलते अब प्रशासन कैंपस की दो इमारतों को गिराने की तैयारी में है. कभी भी बुलडोजर कार्रवाई हो सकती है. लिहाजा सुप्रीम कोर्ट शीघ्र सुनवाई कर इसमें दखल दे.

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गौरतलब है कि सपा नेता आजम खान के मामले में जमानत का आदेश आते ही एक नया प्रकरण दर्ज होने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आखिर ये कैसा संजोग है कि आजम खान के खिलाफ जब भी अंतिम मामले में जमानत का आदेश दिया जाता है, तभी सरकार या प्रशासन उनके खिलाफ एक नया मामला दाखिल कर देता है. ऐसा लगातार होना कोई संयोग नहीं हो सकता.

सुप्रीम कोर्ट आजम खान की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए 19 मई को उन्हें जमानत दे दी थी. जमान संबंध प्रक्रिया पूरा होने के बाद 19 मई की देर रात तक उनके जमानत का परवाना सीतापुर जेल पहुंचा और 20 मई को वे जमानत पर जेल से छूट गए. जेल के छूटने के बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें कहा कि मेरी तबाहियों में मेरे अपनों का बड़ा योगदान है.

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