लखनऊ हादसे के बाद यूपी के कई शहरों में बड़ा एक्शन... इस शहर की मशहूर कोचिंग का फायर यंत्र निकला फेल, अधिकारियों ने दिया नोटिस
Pratapgarh coaching centre: लखनऊ अग्निकांड के बाद प्रतापगढ़ की स्कॉलर कोचिंग में फायर विभाग ने छापा मारा है. जांच के दौरान कोचिंग की खौफनाक हकीकत सामने आई है. दरअसल कोचिंग सेंटर में सुरक्षा के लिए फायर यंत्र तो लगे थे, लेकिन वह सभी यंत्र या तो जंग खा रहे थे या शोपीस बने हुए थे.
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Pratapgarh coaching centre: लखनऊ के गेमिंग जोन में आग लगने से कई मासूम बच्चों की जान चली गई है. इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश प्रशासन की आंख खुल गई है और अब वो लगातार राज्य के कई जगहों पर कार्यवाही में जुटी हुई है. लखनऊ हादसे के बाद प्रतापगढ़ का फायर विभाग भी जाग गया है. प्रतापगढ़ की स्कॉलर कोचिंग में जब फायर विभाग ने छापा मारा, तो वहां की खौफनाक हकीकत सामने आ गई. कोचिंग सेंटर में सुरक्षा के लिए फायर यंत्र तो लगे थे, लेकिन वह सभी यंत्र या तो जंग खा रहे थे या सिर्फ शोपीस बने हुए थे.
जंग खा रहे थे फायर यंत्र
लखनऊ हादसे से सबक लेने के बाद प्रशासन चौकन्ना हो गया है. प्रतापगढ़ की स्कॉलर कोचिंग में जब फायर टीम जांच के लिए पहुंची, तो वहां मौजूद एक्सटिंग्विशर जंग खा रहे थे. कोचिंग संस्थान में लगा फायर अलार्म सिस्टम भी पूरी तरह से बेकार पड़ा था. अगर वहां किसी तरह अनहोनी होती या आग लग जाती, तो छात्रों के बचने की कोई उम्मीद नहीं थी. जांच में पता चला कि कोचिंग संस्थान सुरक्षा के नाम पर छात्रों के साथ सीधा धोखा कर रही थी.
कोचिंग संचालक को दिया गया नोटिस
जांच के बाद कोचिंग संचालक ने आनन-फानन में खराब यंत्रों को मरम्मत के लिए भेजा है. इसके साथ ही लापरवाही के लिए कोचिंग संचालक को नोटिस भी दिया गया है. इस कार्यवाही के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब यह कोचिंग साल भर से चल रही थी, तो अब तक फायर विभाग की जांच कहां थी? लाइसेंस देने से पहले इन यंत्रों की जांच क्यों नहीं हुई थी? जब लखनऊ में मौतें हुई हैं, तब जाकर प्रतापगढ़ प्रशासन को याद आया है कि यहां भी कोचिंग मौजूद हैं.
जिले की सभी कोचिंग की जांच
स्थानीय लोग प्रशासन पर सवाल खड़े कर रहे हैं. उनका मानना है कि प्रशासन अगर समय पर फायर यंत्र चेक करता, तो शायद लखनऊ जैसी घटना टल सकती थी. तो वहीं फायर विभाग लखनऊ हादसे के बाद प्रतापगढ़ जिले की सभी कोचिंग की जांच कर रहा है. लखनऊ हादसे से यह साफ है कि प्रशासन की ओर से कागजों पर फायर एनओसी (NOC) दे दी जाती है लेकिन जमीनी हकीकत में यह यंत्र शोपीस बने रहते हैं. जिसके चलते बड़े हादसे होने की संभावना प्रबल हो जाती है.
