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बलिया में कंबल बंटने से पहले ही लूट ले गए लोग, बवाल देख ताकते रह गए मंत्री दयाशंकर सिंह

Ballia Viral Video: बलिया में विक्रमादित्य पांडे की पुण्यतिथि पर उनके बेटे मुन्ना पांडे द्वारा हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धांजलि सभा और कंबल वितरण का आयोजन किया गया था. इस कार्यक्रम में सपा सांसद सनातन पांडे और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह समेत कई दिग्गज मौजूद थे.जैसे ही मंत्री जी ने कंबल बांटने की शुरुआत हुई छीना-झपटी शुरू हो गई.

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Ballia Viral video
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Ballia Viral Video: उत्तर प्रदेश के बलिया से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर आप दंग रह जाएंगे. अवसर था दिग्गज सपा नेता स्वर्गीय विक्रमादित्य पांडे की पुण्यतिथि का जहां कंबल वितरण के दौरान भारी हंगामा और छीना-झपटी देखने को मिली. हालात इस कदर बेकाबू हो गए कि लोग एक-दूसरे के हाथों से कंबल खींचने लगे. मंच पर मची इस लूट को देख मुख्य अतिथि और यूपी के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह को कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर निकलना पड़ा. इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

कंबल की बटाई या कुटाई? 

बलिया में विक्रमादित्य पांडे की पुण्यतिथि पर उनके बेटे मुन्ना पांडे द्वारा हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धांजलि सभा और कंबल वितरण का आयोजन किया गया था. इस कार्यक्रम में सपा सांसद सनातन पांडे और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह समेत कई दिग्गज मौजूद थे. जैसे ही मंत्री जी ने कंबल बांटने की शुरुआत की पीछे से कंबलों से भरी एक गाड़ी आई. गाड़ी खुलते ही भीड़ बेकाबू हो गई. इस दौरान लोग एक दूसरे पर गिरते पड़ते नजर आए. वहीं  महिलाएं भी कंबल के लिए भिड़ती नजर आईं. वहीं एक व्यक्ति कंबल हवा में उठाए बस इस उलझन में खड़ा है कि आखिर किसे देक्योंकि लोग उसके हाथों से कंबल झपट रहे थे. इस दौरान का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. 

यहां देखें पूरी वीडियो रिपोर्ट

 

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मंत्री दयाशंकर सिंह का पलायन और चुनावी चर्चा 

इस दौरान हुड़दंग इतना बढ़ गया कि सुरक्षा व्यवस्था धरी की धरी रह गई. स्थिति बिगड़ती देख मंत्री दयाशंकर सिंह ने वहां से निकल जाना ही बेहतर समझा. हालांकि बलिया की सदर सीट से विधायक दयाशंकर सिंह के लिए यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था बल्कि 2027 के चुनाव की आहट भी थी. एक तरफ वह विकास के बड़े दावे कर रहे हैं जैसे अंतरराष्ट्रीय बस अड्डा और जेल की जगह मेडिकल कॉलेज का निर्माण तो दूसरी तरफ स्थानीय समीकरण कुछ और ही इशारा कर रहे हैं.

स्थानीय पत्रकारों और जनता के बीच सुगबुगाहट है कि विकास के दावों के बावजूद शहर में जल निकासी, बदहाल सड़कें और जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी जैसे मुद्दे अब भी जस के तस हैं. जानकारों का मानना है कि अगर विपक्ष ने कोई मजबूत चेहरा उतारा तो बीजेपी के लिए 2027 की राह कठिन हो सकती है. जिस तरह पिछले चुनाव में तत्कालीन मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला को लेकर जनता में आक्रोश था वैसा ही कुछ खतरा वर्तमान मंत्री के साथ भी देखा जा रहा है. हालांकि सदर विधानसभा में यादव-मुस्लिम समीकरण के बीच अगर भाजपा का पीडीए फैक्टर और अन्य जातियों का साथ बना रहा तो पलड़ा भारी रह सकता है.