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शंकराचार्य के अपमान से नाराज होकर इस्तीफा देने वाले मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को DM ने बुलाया फिर बंद कमरे में 2 घंटे ये हुआ

UGC Regulations 2026 Controversy : अलंकार अग्निहोत्री का दावा है कि बंद कमरे में उन्हें प्रलोभन दिया गया कि वे अपने इस्तीफे को 'काम के तनाव' का नाम देकर छुट्टी पर चले जाएं. इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन से जान का खतरा होने जैसे भी आरोप लगाए हैं.

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Magistrate Alankar Agnihotri
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Alankar Agnihotri UGC Controversy: उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री और जिला प्रशासन के बीच ठन गई है.अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया है कि जिलाधिकारी और जिला प्रशासन ने उन्हें बंधक बनाने की कोशिश की. अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) का दावा है कि बंद कमरे में उन्हें प्रलोभन दिया गया कि वे अपने इस्तीफे को 'काम के तनाव' का नाम देकर छुट्टी पर चले जाएं. इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन से जान का खतरा होने जैसे भी आरोप लगाए हैं. वहीं प्रशासन की ओर से एडीएम देश दीपक सिंह ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट साहब को केवल सरकारी सेवा नियमावली का पाठ पढ़ाया गया था और उन्हें ससम्मान चाय-कॉफी पिलाई गई थी.

अलंकार अग्निहोत्री ने प्रशासन पर लगाए ये आरोप

बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि उन्हें जिलाधिकारी कार्यालय में उन्हें अकेला पाकर दबाव बनाया गया. उन्होंने दावा किया कि मीटिंग के दौरान DM के पास लखनऊ से एक फोन आया था.अलंकार का दावा है कि स्पीकर पर आवाज आई कि 'यह *** पंडित पागल हो गया है.इसे रात भर बंधक बनाकर रखो.' अलंकार ने बताया कि यह सुनते ही उन्होंने तुरंत बार एसोसिएशन के सचिव दीपक पांडेय को फोन कर खुद के बंधक होने की सूचना दी. मीडिया और वकीलों के सक्रिय होने पर ही उन्हें वहां से छोड़ा गया. प्रशासन चाहता था कि मैं यह बयान दे दूं कि मैंने स्ट्रेस की वजह से इस्तीफा दिया है ताकि संतों के अपमान और UGC वाले मुद्दे से ध्यान भटक सके.

'चाय कॉफी के साथ सिर्फ आचरण नियमावली समझाई गई'

वहीं इस मामले को लेकर जब यूपी Tak ने एडीएम दीपक सिंह से बात की तो उन्होंने अलंकार अग्निहोत्री के सभी आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि 'सिटी मजिस्ट्रेट साहब खुद डीएम साहब से मिलने आए थे.वहां एडीएम सिटी, एडीएम प्रशासन और कप्तान साहब भी मौजूद थे.उन्हें केवल यह समझाया गया कि जब तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हो जाता वे एक सरकारी सेवक हैं. उन्हें 'कर्मचारी आचरण नियमावली' का पालन करना चाहिए और उसी के अनुसार व्यवहार करना चाहिए.एडीएम ने कहा कि लखनऊ से किसी फोन आने या बंधक बनाने जैसी कोई बात नहीं हुई. उन्हें बैठाकर सम्मान के साथ चाय-कॉफी पिलाई गई थी. प्रशासन ने अलंकार अग्निहोत्री के 'जान के खतरे' वाले बयान पर हैरानी जताई है. एडीएम देश दीपक सिंह के अनुसार 'सुबह तक वह हमारे साथ ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल थे और अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे थे. सात महीने से वे हमारे साथ काम कर रहे हैं. कभी कोई कड़वाहट नहीं रही. अचानक ऐसी जान के खतरे वाली बात करना बेबुनियाद है.' प्रशासन का कहना है कि इस्तीफा देना अलंकार अग्निहोत्री का व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है. लेकिन तकनीकी रूप से वे अभी भी सेवा में हैं. उन्हें नियमों के दायरे में रहकर ही अपनी बात रखनी चाहिए. 

सरकारी आवास खाली करने का फैसला

अलंकार अग्निहोत्री ने असुरक्षा का हवाला देते हुए तत्काल अपना सरकारी आवास खाली करने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि 'प्रशासन की मंशा अब स्पष्ट नहीं है. यहां भय का माहौल है. मैं अपनी जान बचाकर वहां से निकला हूं और अब जनता की अदालत में जाऊंगा.'