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माइनस 25 डिग्री में जब लेह के बर्फीले तूफान में फंस गए आगरा के 4 लड़के, कैसे बचे ये इनमें से एक शिवम ने बताया

Nakila Pass Leh survival story of four friends: आगरा के रहने वाले  शिवम चौधरी ने बताया कि 6 जनवरी को वह अपने तीन दोस्तों के साथ कश्मीर के लिए निकले थे. इस दौरान उन्हें बर्फीले तूफान का सामना करना पड़ा जिसमें वह बुरी तरह फंस गए. ऐसे में इन चारों दोस्तों की तीन रात कैसे बर्फीली वादियों में गुजरी खुद इन्होने बताई है जिसे सुनकर हर कोई हैरान है.

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Agra News
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Nakila Pass Leh survival story of four friends: आगरा के मधुनगर के रहने वाले  शिवम चौधरी अपने दोस्त यश मित्तल, जयवीर सिंह और सुधांशु फौजदार के साथ 6 जनवरी को कश्मीर यात्रा पर निकले थे. कश्मीर की वादियों का लुत्फ उठाने के बाद चारों दोस्तों ने लद्दाख स्थित पेंगोंग लेक जाने का फैसला किया. इसी बीच यह तय हुआ कि पेंगोंग लेक विजिट करने के बाद ये मनाली के रास्ते दिल्ली होते हुए आगरा आएंगे. लेकिन तब उन्हें ये नहीं पता था कि उनके सामने एक ऐसा पल आने वाला है जिससे उनका जीवन मुश्किल में पड़ सकता है. ये सभी लद्दाख के पेंगोंग की बर्फीली वादियों में फंस गए. लेकिन भारतीय सेना और लद्दाख प्रशासन के संयुक्त सर्च ऑपरेशन ने इन युवाओं को एक नई जिंदगी दी. फिलहाल ये चारों दोस्त अपने-अपने घर पहुंच चुके हैं. लेकिन बर्फीले तूफान के बीच माइनस 25 डिग्री सेल्सियस में खुले आसमान के बीच गुजारी तीन रातों का यह अनुभव वह ताउम्र नहीं भूल पाएंगे. 

लद्दाख के बर्फीले तूफान में फंस गए चारों दोस्त

आगरा के रहने वाले  शिवम चौधरी ने बताया कि 6 जनवरी को वह अपने तीन दोस्तों के साथ कश्मीर के लिए निकले थे.इस दौरान ये सभी पूरे रास्ते का मौज लेते फोटोग्रॉफी करते हुए जा रहे थे.फिर 9 जनवरी की शाम पेंगोंग लेक घूमने के बाद उन्होंने गूगल मैप के सहारे मनाली के रास्ते दिल्ली होते हुए आगरा लौटने का फैसला किया. लेकिन इस दौरान उन्हें बर्फीले तूफान का सामना  करना पड़ा. बर्फीले रास्ते में फोन की बैटरी भी  जवाब दे गई और सिग्नल गायब हो गए. शिवम के पिता दौलत राम चौधरी ने बताया कि 9 जनवरी की शाम 5.22 बजे आखिरी वीडियो कॉल हुई थी जिसके बाद संपर्क पूरी तरह कट गया.

शिवम ने बताया कि लेह से आगे 'नकीला पास' के पास उनकी गाड़ी फंस गई. ऐसे में उन्होंने-25 डिग्री की बर्फीली ठंड से बचने के लिए गाड़ी का हीटर तब तक ऑन रखा जब तक फ्यूल खत्म नहीं हो गया. उनके पास एक छोटा सिलेंडर था जिसकी लौ जलाकर वे बर्फ पिघलाते रहे और उसी पानी से अपना गला तर किया. लेकिन जब हिम्मत जवाब देने लगी तो उन्होंने हार नहीं मानी और सड़क पर पत्थरों से HELP ME लिखकर बोर्ड लगाया.

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वहीं बच्चों से संपर्क ना हो पाने से आगरा में परिजनों की चिंता बढ़ रही थी. उन्होंने रक्षा मंत्रालय, स्थानीय प्रशासन और लद्दाख पुलिस से गुहार लगाई. शिवम के पिता ने गाड़ी के जीपीएस की आखिरी लोकेशन ट्रेस करवाई. 12 जनवरी को सेना ने ड्रोन और खोजी दलों के साथ ऑपरेशन तेज किया. इसी बीच युवाओं ने 15-20 किलोमीटर पीछे पैदल चलकर एक सुनसान घर में शरण ली जहां मिले राशन से उन्होंने अपनी भूख मिटाई. 12 जनवरी की दोपहर सेना की टुकड़ी उन तक पहुंची. युवाओं के मुताबिक सेना के जवान उनके लिए फरिश्ते की तरह आए.

13 जनवरी को जब परिजन लेह पहुंचे तो बच्चों को देख भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा. 14 जनवरी को मेडिकल चेकअप और कागजी कार्रवाई के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया. अब आगरा लौटे शिवम और यश अन्य पर्यटकों को सलाह देते हैं कि लद्दाख की ट्रिप में कभी भी फ्यूल का एक्स्ट्रा टैंक साथ रखें, रात में सफर बिल्कुल न करें, स्थानीय गाइड को साथ लें और पुलिस को अपनी जानकारी जरूर दें.

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