नरेंद्र गिरि डेथ केस में आरोपी अशोक चोटिया उर्फ आनंद गिरि की कहानी

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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद एक कथित सुसाइड नोट सामने आया है, जिसमें उनके शिष्य रहे आनंद गिरि पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. आनंद गिरि उर्फ अशोक चोटिया राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के बाह्मणों की सरेरी गांव से ताल्लुक रखते हैं.

आनंद गिरि का जन्म साल 1984 में हुआ था. कक्षा 6 में पढ़ाई करते समय वह घर छोड़कर चले गए थे. इसके बाद साल 2014 में वह अपने गांव आए थे. आखिरी बार 31 मई 2021 को वह अपनी मां नानू देवी के अंतिम संस्कार में शामिल होने गांव आए थे. आनंद के बचपन का नाम अशोक कुमार था और उन्हें अशोक चोटिया कहा जाता था. उनके तीन भाई भंवर लाल, कैलाश और रामस्वरूप हैं.

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अशोक चोटिया घर छोड़कर जाने के बाद हरिद्वार पहुंचे थे, जहां वह महंत नरेंद्र गिरि के संपर्क में आए थे. नरेंद्र गिरि ने अशोक से पूछा था कि वह क्या करना चाहते हैं, इस पर अशोक ने कहा कि वह पढ़ाई करना चाहते हैं. इसके बाद नरेंद्र गिरि ने पहले उनको पढ़ाया और फिर दीक्षित किया.

अब अशोक चोटिया उर्फ आनंद गिरि को पुलिस ने नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में गिरफ्तार किया है. इस मामले पर यूपी के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने 21 सितंबर को बताया, ”आनंद गिरि के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है.”

इस बीच, आनंद गिरि के पिता रामेश्वर लाल ने बताया, ”वह (आनंद) शुरू से संत स्वभाव का था. बचपन में ही घर छोड़कर चला गया. 13 साल बाद मुझे कुंभ के मेले में मिला था और उसके बाद दो बार ही गांव आया था. वो कभी-कभी फोन जरूर कर लेता था.”

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इसके आगे रामेश्वर लाल ने बताया, ”हमने उससे किसी प्रकार की कोई आर्थिक सहायता नहीं ली. ना ही उसकी कोई संपत्ति गांव में है लेकिन इस प्रकार का जो आरोप लगा है उससे मेरे मन में पीड़ा है.”

”फोटो वायरल कर देगा आनंद गिरि”, नरेंद्र गिरि के कथित सुसाइड नोट में क्या-क्या लिखा है?

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