लखीमपुर खीरी रेप-हत्या केस: पीड़िताओं का भाई बोला- बहनें सभी की मदद करने वाली लड़कियां थीं
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लखीमपुर खीरी रेप-हत्या केस: पीड़िताओं का भाई बोला- बहनें सभी की मदद करने वाली लड़कियां थीं

Lakhimpur Kheri rape and murder case: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में जिन दो दलित किशोरियों की कथित रूप से बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई, उनके भाई का कहना है कि उनकी बहनें महत्वाकांक्षी और सभी की मदद करने वाली लड़कियां थीं. बड़ी बहन 17 साल की थी. उसने पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी और अपनी बीमार मां की देखभाल कर रही थी. परिवार के अन्य लोग चाहते थे कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करे और परिवार के लिए पैसे कमाए.

पीड़िताओं के भाई ने कहा, "छह महीने पहले हमारी मां का गर्भाशय का ऑपरेशन हुआ था, जिसके कारण मेरी बहन चिंतित थी और वह मां की देखभाल के लिए घर पर रहना चाहती थी। इसी वजह से उसने पढ़ाई छोड़ दी थी." दो किशोरियों के साथ कथित बलात्कार एवं उनकी हत्या के मामले में बृहस्पतिवार को छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इन दोनों किशोरियों के शव गन्ने के एक खेत में एक पेड़ से लटके मिले थे.

भाई ने अपनी 15 वर्षीय छोटी बहन को याद करते हुए कहा, "वह बहुत मेधावी और महत्वाकांक्षी थी. वह नौकरी करके परिवार की मदद करना चाहती थी." उसने कहा, "मेरी छोटी बहन 10वीं कक्षा में पढ़ रही थी. वह हमेशा कहती थी कि वह नौकरी करके परिवार के लिए पैसे कमाना चाहती है. वह अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती थी."

पुलिस सूत्रों ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लड़कियों का बलात्कार करने के बाद उनका गला घोंटा गया था.

लखीमपुर खीारी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) संजीव सुमन ने संवाददाताओं को बताया कि प्रारंभिक जांच के अनुसार, लड़कियां दो आरोपियों जुनैद एवं सोहेल के साथ बुधवार दोपहर अपने घर से निकली थीं.

उन्होंने कहा कि दोनों बहनों एवं आरोपियों के बीच प्रेम संबंध थे और बहनें विवाह का दबाव बना रही थीं, जिसके बाद उनका गला घोंट दिया गया.

पुलिस अधिकारी के बयान से निराश भाई ने आरोप लगाया कि पुलिस ने मामले में ‘खुद को शर्मिंदगी से बचाने’ के लिए ‘मनगढ़ंत कहानी’ बनाई है. उसने कहा, ‘‘पुलिस अपने फायदे के लिए मनगढ़ंत कहानियां बना रही है. वे झूठ बोल रहे हैं. मेरी बहनों का अपहरण किया गया था और वे इन युवकों को जानती ही नहीं थीं. हममें से कोई उन्हें नहीं जानता था, इसलिए मुझे कभी यह अंदाजा ही नहीं लग पाया कि मेरी बहनों का जीवन जोखिम में है."

पीड़िताओं के भाई ने अपराधियों को ‘मृत्युदंड’ दिए जाने की मांग की. उसने कहा, ‘‘मैंने अपनी दो बहनों को खो दिया है और मैं न्याय की मांग करता हूं. अपराधियों को मृत्युदंड दिया जाना चाहिए.’’ पीड़िताओं का भाई हिमाचल प्रदेश में काम करता था और वह कुछ साल पहले दिल्ली आ गया था. वह एक निजी कारखाने में कार्यरत था और करीब एक महीने पहले घर लौटा था.

लड़कियों का पिता एक भूमिहीन मजदूर है और उसने पुलिस की जांच पर संतोष व्यक्त किया है. पीड़िताओं के संबंधियों ने परिवार के किसी एक सदस्य के लिए सरकारी नौकरी और पर्याप्त मुआवजा तथा अपराधियों को मृत्युदंड दिए जाने की मांग की है.

जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि दोनों लड़कियों के परिजनों को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) कानून के प्रावधानों के तहत 8.25 लाख रुपये मुआवजा देने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि प्रशासन परिवार की अन्य मांगों को राज्य सरकार के पास भेजेगा.

इससे पहले, पीड़िताओं की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराके आरोप लगाया था कि उनके पड़ोसी छोटू के साथ मोटरसाइकिल पर आए तीन अज्ञात युवक उनकी झोंपड़ी में जबरन घुस आए थे और उन्होंने उनकी बेटियों का अपहरण कर लिया था.

पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 376 (बलात्कार) और 452 (चोट, हमला या गलत तरीके से रोकना) तथा यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज किया है. एससी/एसटी अधिनियम के प्रावधानों को भी प्राथमिकी में शामिल किया गया है.

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