भरथना विधानसभा 2027: क्या सपा के गढ़ इटावा में खिलेगा कमल? ब्राह्मण-दलित समीकरण की पूरी रिपोर्ट
Bharthana Assembly Election 2027: सपा के गढ़ इटावा की भरथना सीट पर 2027 में क्या होगा? जानिए क्या ब्राह्मण और दलित वोटरों का मेल बीजेपी को जीत दिला पाएगा या सपा अपनी साख बचाएगी. देखिए ग्राउंड रिपोर्ट.

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Bharthana Assembly Election 2027: टावा जिले की भरथना (सुरक्षित) विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ मानी जाती है. यहाँ से कभी मुलायम सिंह यादव भी विधायक रहे हैं. 2027 के चुनावों के लिए यहां अभी से सियासी बिसात बिछने लगी है.
भरथना का चुनावी इतिहास
यह सीट 2012 में सुरक्षित हुई थी.
वर्तमान में यहां से समाजवादी पार्टी के राघवेंद्र कुमार विधायक हैं.
2017 में बीजेपी की सावित्री कठेरिया ने यहाँ जीत दर्ज की थी, लेकिन 2022 में सपा ने फिर से इस पर कब्जा कर लिया.
जातीय समीकरण
सीट पर जीत-हार का फैसला मुख्य रूप से दलित और ब्राह्मण वोटों के ध्रुवीकरण पर निर्भर करता है.
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कुल वोटर: लगभग 3,80,000
दलित: 70,000 (सबसे निर्णायक भूमिका)
यादव: 50,000 | ब्राह्मण: 50,000
साक्य, पाल और अन्य ओबीसी: 60,000
मुस्लिम: 40,000 | क्षत्रिय: 30,000
सपा का कहना है कि उनके विधायक ने क्षेत्र में बहुत काम किया है और दलित-यादव-मुस्लिम गठबंधन (PDA) के दम पर वे 2027 में भी जीतेंगे. भाजपा नेता सिद्धार्थ शंकर (जो जेएनयू से पीएचडी हैं) का मानना है कि जनता अब पढ़े-लिखे जनप्रतिनिधि को चुनना चाहती है और ब्राह्मण-क्षत्रिय वोटों के साथ दलितों का एक हिस्सा उनके साथ आएगा.
इस सीट पर 'ब्राह्मण-दलित' फैक्टर
स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, यदि ब्राह्मण और दलित वोट एक साथ बीजेपी की ओर झुकते हैं, तो सपा के लिए यहां मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. हालांकि, यूजीसी (UGC) जैसे मुद्दों पर सवर्णों की संभावित नाराजगी और बसपा का दलित वोट बैंक में दखल इस समीकरण को बिगाड़ भी सकता है.










