यूपी: सूखे से कृषि क्षेत्र में संकट के बादल, इंद्रदेव और प्रशासन की बेरुखी से किसान परेशान

यूपी: सूखे से कृषि क्षेत्र में संकट के बादल, इंद्रदेव और प्रशासन की बेरुखी से किसान परेशान
फोटो: समर्थ श्रीवास्तव, यूपी तक

जिस वक्त उत्तर प्रदेश में प्रचंड बारिश होती है उस वक्त प्रदेश के 62 जिलों में सूखे जैसे हालात हो गए हैं, पर अभी भी सरकार द्वारा किसी जिले को सूखाग्रस्त घोषित करना है या नहीं, इसके लिए रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.

यूपी में कम बारिश होने की वजह से खरीफ की फसलों को बचा पाना मुश्किल हो रहा है. सिर्फ विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष के भी कई विधायक और सांसद प्रदेश के विभिन्न अंचलों खासतौर पर पूर्वांचल और मध्य यूपी को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग कर रहे हैं. यह जनप्रतिनिधि सीएम योगी को पत्र लिखकर अपने-अपने क्षेत्र की हालत बयान करते हुए सूखा घोषित करने की मांग कर रहे हैं.

मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार जून से 10 सितंबर तक प्रदेश में बारिश का आंकड़ा 50 फीसदी से भी नीचे गिर चुका है. 10 सितंबर तक यूपी में सामान्य के मुकाबले महज 46% बारिश हुई है. 20 के ऊपर जिले ऐसे हैं जहां अब तक 40% से भी कम बारिश हुई है.

बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने तो पिछले दिनों लोकसभा में मांग की कि केंद्र सरकार सूखे का आकलन करने के लिए एक अध्ययन दल यूपी भेजें. वहीं बस्ती के बीजेपी सांसद हरीश त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री योगी को पत्र लिखकर पूर्वांचल को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है.

भारतीय किसान यूनियन (राजनीतिक) के प्रदेश अध्यक्ष हरनाम सिंह वर्मा ने सीएम योगी से पूरे यूपी को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि सभी किसानों के पास सरकारी नलकूप या नहर के पानी की सिंचाई की सुविधा नहीं है.

7 सितंबर को सीएम योगी ने प्रदेश में सूखे का सर्वेक्षण करने के लिए सभी जिलों के डीएम को एक हफ्ते में शासन को रिपोर्ट देने का आदेश दिया. लेकिन जब आज यूपी तक सूखे की पड़ताल करने लखनऊ से 40 किलोमीटर दूर इटौंजा में बसे रेवामऊ गांव पहुंचा, तो हालत दयनीय नजर आए. किसानों ने बताया कि इंद्रदेव नाराज हैं जिसके चलते बारिश नहीं हो रही, धान बोया है पर पैदावार नहीं है, जमीन छिटक गई है.

तमाम सरकारी और प्रशासन के दावों के बीच किसानों की असल हालत

लखनऊ के किनारे बसे बख्शी का तालाब के रेवा मऊ गांव में रहने वाले किसान राम किशन सिंह धान की खेती करते हैं और इस दफा सूखे के चलते उन्हें लगभग एक लाख रुपये का नुकसान हुआ है. आज बाबा अपनी पोती और बेटे के साथ अपने घर की चौखट पर बैठे हैं और मायूसी से सरकारी मदद का इंतजार कर रहे हैं.

किशन ने यूपी तक को बताया कि उनकी पोती दसवीं तक पढ़ पाई है. अगर धान रोपाई का पैसा मिल गया होता तो वह उसकी पढ़ाई आगे चलवा पाते और अब वह घर पर बैठी है. किशन की पोती कोमल बताती हैं कि पैसे की कमी के चलते उसने पढ़ाई छोड़ दी.

किशन कहते हैं कि मेरी फसल बीच के नहर में है. अगर नहर में ही पानी होता तो शायद धान की बुवाई हो जाती, पर सिंचाई विभाग ने ध्यान नहीं दिया और नहर जिसका इस्तेमाल हो सकता था वह आज भी सूखा पड़ा है.

कुछ ऐसा ही हाल राम बहादुर सिंह का है. इनकी भी धान की खेती है और यह भी हजारों रुपये का नुकसान झेल रहे हैं. राम बहादुर की मुसीबतें सूखे के चलते पहले ही कम नहीं थीं और अब उनके सिर पर बैंक का कर्ज चढ़ गया है. राम बहादुर कहते हैं कि वह बर्बाद हो गए हैं और अब ऐसी नौबत आ गई है कि कहीं वह खुदखुशी ही ना कर ले. वो पीछे बैठी पत्नी पूनम सिंह से बैंक का कागज लेते हैं और यूपी तक के कैमरे में दिखाते हैं कि एक लाख रुपये के ऊपर का लोन हो चुका है और उनसे बैंक वाले कह रहे हैं कि अब अगर उन्होंने यह पैसा नहीं चुकाया तो उनके जमीन पर झंडा लगा दिया जाएगा, जिससे वह खेती करने का अधिकार खो बैठेंगे.

वहीं पत्नी पूनम यूपी तक को बताती हैं कि घर गृहस्थी सब चौपट हो गई है. बच्चों की पढ़ाई छूट गई है तो वहीं अब धीरे-धीरे खाने के भी लाले पड़ रहे हैं. उनका कहना है कि प्रशासन की तरफ से ना ही कोई राहत दी गई और ना ही कोई सरसों या दाल के बीज.

एक और किसान जीत बहादुर की लगभग 10 बीघा जमीन है, जिसमें वह धान की खेती करते हैं पर आज वो गुस्से में हैं. यूपी तक को देखते ही उनका गुस्सा फूट पड़ता है और वह प्रशासन को कोसने लगते हैं. वह कहते हैं कि पूरा क्षेत्र सूखा पड़ा है और अभी तक सरकार इसे सूखाग्रस्त घोषित नहीं कर रही है. उन्होंने कहा कि बारिश हुई नहीं है और अगर ट्यूबवेल से बुवाई करवाएंगे तो हजारों रुपए पेट्रोल खर्च में निकल जाएंगे. अब घर चलाना भी मुश्किल हो रहा है.

थोड़ा आगे बढ़ने पर एक नहर नजर आया. यह नहर कम जमीन के नीचे बना जंगल ज्यादा नजर आया. गांव वालों ने बताया यह भी सुखा पड़ा है. अगर सिंचाई विभाग को निर्देश मिले तो यहां क्यों पानी नहीं आता. अगर इसकी झाड़ियां कटवा दी होतीं तो शायद इसमें भी पानी होता और किसानों की मदद हो जाती.

कृषि मंत्री कैमरा पर आने से कतराते रहें, बोले प्रेस कांफ्रेंस में बोल चुका

यूपी तक जब किसानों की दयनीय हालत जान लखनऊ में सीएम आवास और विधानसभा से 2 किलोमीटर दूर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के आवास पहुंचा, तो सूखे के मामले को लेकर मंत्री साहब की संवेदनहीनता साफ नजर आई. सुबह 11 बजे का समय दिया गया और यूपी तक की टीम दो घंटे मंत्री साहब का इंतजार करती रही. बार-बार दरवाजा खुलता, कोई बुलाया जाता और फिर दरवाजा बंद हो जाता.

मुद्दा किसानों का था, तो यूपी तक ने इंतजार किया और फिर आखिरकार मंत्री साहब ने यूपी तक को अंदर बुलाया और कैमरा देखते ही बोले कि मैं कल ही बोला चुका हूं प्रेस कांफ्रेंस में, अब और कुछ नहीं बोलना है.

जब यूपी तक संवाददाता ने उनसे सवाल किया कि किसानों तक मदद नहीं पहुंची है तो वह बोले सब जगह पहुंच रही, फिर कैमरा देख बोले इसे बंद करिए. ऐसे यूपी में जहां किसान सूखे के चलते कराह रहे हैं, वहां के कृषि मंत्री के पास इस मुद्दे पर बात करने में रुचि नहीं दिखाई दी.


कहां कितनी बारिश हुई?

मौसम विभाग के निदेशक डॉक्टर जेपी गुप्ता ने यूपी तक को बताया कि कहीं भी अगर सूखा हुआ है, उसको जांचने के दो से तीन माध्यम होते हैं. सबसे पहला माध्यम होता है कि बारिश कितना प्रतिशत कम हुई है. मिट्टी में नमी कितनी है, इससे भी सूखा नापा जाता है. इसके अलावा sowing कितनी हुई है, यह भी एक अहम बात होती है.

उन्होंने बताया कि पिछले साल से इस बार 46 प्रतिशत कम बारिश हुई है. यह आंकड़ा जून 1 से सितंबर 10 तक का है. हालांकि, सितंबर खत्म होते होते बारिश के आसार दिख रहे हैं.

25 जिले जहां 40% से अब तक कम बारिश हुई

उन्नाव, सिद्धार्थ नगर, श्रावस्ती, पीलीभीत, अमरोहा, बहराइच, बागपत, महाराजगंज, अमेठी, शाहजहांपुर, बलिया, गोंडा, रामपुर, बस्ती, मऊ, संतकबीरनगर, कानपुर देहात, चंदौली, गाजियाबाद, कौशांबी, कुशीनगर, गौतमबुद्ध नगर, फर्रुखाबाद, रायबरेली और जौनपुर.

जून से 19 अगस्त तक यूपी के किस अंचल में कितने प्रतिशत बारिश हुई है- मध्य यूपी में 46%, पश्चिमी यूपी में 54%, बुंदेलखंड में 64.9 प्रतिशत और पूर्वांचल में 41% लगभग बारिश प्रतिशत रहा है.

यूपी में औसत से आधे भी बारिश नहीं है

जून से 4 सितंबर तक 675.3 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, जबकि 330 मिली मीटर हुई है, जो कि सामान्य बारिश की तुलना में 48.9 फीसदी है. 40 मिली मीटर से कम बारिश वाली सूची में प्रदेश के 24 जिले शामिल हैं.

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