लेटेस्ट न्यूज़

क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि का पर्व? जानें इस दिन शिवलिंग पूजन की महिमा

यूपी तक

हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व विशेष महत्व रखता है. यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है.

ADVERTISEMENT

महाशिवरात्रि 2025
महाशिवरात्रि 2025
social share
google news

Maha Shivratri 2025: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व विशेष महत्व रखता है. यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है. हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर भगवान शिव और शिवलिंग की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.

महाशिवरात्रि का पौराणिक महत्व

महाशिवरात्रि मनाने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं.


1. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था. इस दिन को शिव-पार्वती विवाहोत्सव के रूप में मनाया जाता है. भक्तगण इस दिन शिवलिंग का अभिषेक कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं.

यह भी पढ़ें...

2. पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी के बीच यह विवाद हुआ कि उनमें सबसे शक्तिशाली कौन है. इस विवाद को हल करने के लिए भगवान शिव ने एक विशाल और अनंत शिवलिंग का प्राकट्य किया. ब्रह्मा जी और विष्णु जी ने उस शिवलिंग का आदि और अंत जानने का प्रयास किया, लेकिन वे असफल रहे. तब उन्होंने भगवान शिव की महत्ता को स्वीकार किया और उनकी पूजा-अर्चना की. यही कारण है कि महाशिवरात्रि को भगवान शिव के शिवलिंग स्वरूप की उपासना का विशेष दिन माना जाता है.

3. एक अन्य मान्यता के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था, जिससे ब्रह्मांड की समस्त ऊर्जा प्रभावित हुई. इस नृत्य के दौरान उनके शरीर से एक निराकार ऊर्जा प्रकट हुई, जिसे शिवलिंग का स्वरूप माना गया. इसीलिए महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. 

शिवलिंग और पंचतत्व का संबंध

शिवलिंग को पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश का प्रतीक माना जाता है. यही पांच तत्व हमारे शरीर के निर्माण के मूल तत्व माने जाते हैं. महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और बेलपत्र से अभिषेक किया जाता है. ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है.

महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

भगवान शिव को त्याग, तपस्या और ध्यान का प्रतीक माना जाता है. इस दिन व्रत और उपवास रखने से मन और आत्मा की शुद्धि होती है. मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन रात्रि जागरण और भगवान शिव की उपासना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.

कैसे करें महाशिवरात्रि की पूजा?

महाशिवरात्रि के दिन भक्तगण शिवलिंग का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हैं. इस दिन रुद्राभिषेक और शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, और बेलपत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है. ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करने से शिव कृपा प्राप्त होती है. रात्रि जागरण और शिव कथा सुनने का विशेष महत्व है.

महाशिवरात्रि क्यों है खास?

महाशिवरात्रि न केवल भगवान शिव की महिमा का पर्व है. बल्कि यह दिन हमें जीवन में संयम, तपस्या और संतुलन बनाए रखने का संदेश भी देता है.इस शुभ अवसर पर भगवान शिव की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे.

    follow whatsapp