Welcome 2026: नए साल में मायावती और बसपा को क्या मिल सकता है? समझिए इस बड़ी सियासी बात को
साल 2026 बसपा और मायावती के लिए निर्णायक साल होगा. पंचायत चुनाव और संगठन मजबूत करने की रणनीति, मुस्लिम और गैर-जाटव दलित वोटरों की वापसी, गठबंधन के फैसले और पार्टी की मजबूती, सभी पहलू मायावती की 2027 की सत्ता की दिशा तय करेंगे.
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साल 2025 गया और उम्मीदों के नए सवेरे के साथ 2026 ने दस्तक दी. ऐसे में शुभकामना संदेश हैं, नई उर्जा तरंगे हैं, संकल्प हैं, सपने हैं, टारगेट हैं, जोश है, जज्बा है कि बीती को बिसार दे आगे कि सुधि ले. नए साल की यही गरमाहट सियासी गलियारों में भी महसूस की जा सकती है, क्योंकि ये साल यानि 2026 ही होगा निर्णायक साल. क्योंकि यही साल तय कर देगा 2027 की सत्ता की दिशा. यही साल होगा पार्टी वाइज पॉलिसी रिवाइज का साल. यही साल होगा सभी दलों के लिए अपनी कमजोरियों को उखाड़ फेंकने और जीत के लिए मजबूत जड़ों के विस्तार का साल. जब सियासी तौर पर मजबूत जड़ों की बात होती है तो उसमें एक पार्टी सबसे पहले आ जाती है. ऐसी पार्टी जिसकी जड़ें तमाम तूफानों के बाद भी जमी हुईं. हां कमजोर और हिली हुईं जरूर दिखाई देती हैं, लेकिन अभी भी जमीन में, उस मिट्टी के बीच है जो कभी भी वोटों की उस फसल को लहलहा सकती है. जो पूरे देश की पॉलिटिक्स में नई क्रांति ला सकती है. हम बात कर रहे हैं बसपा की. हम बात कर रहे हैं मायावती की.









